कविता: हिलोरें 

सिंधु तट पर, खड़ा था मैं – 

मानस मिलने की चाहत में ।

दिल जो दे बैठा, प्यार तेरा पाने की –

बड़ी चाहत थी इस चाहत में।   

रोक न पाता खुद को मैं, 

जब-जब आती तू  तट पर।   

देख वेग गति तेरी, 

धड़क उठता दिल इस कदर ।

वेग तेरा पकड़ न पाता मैं, 

हार गया तुझसे बाज़ी में ।

भाव समझाती थीं हिलोरें तेरी 

नासमझी में लिप्त कल्पना मेरी ।        

Written by Jayaajitan.

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