अध्यापन काल के आरंभ से लेकर शैक्षणिक वर्ष के अंत तक पढ़ाना- लिखाना इसी पर अध्यापक ध्यान केंद्रित रहता है I जैसे ही परीक्षा काल का आरंभ होता है, पढ़ाई में कमज़ोर छात्रों को अपने विशेष निरीक्षण में रखकर अतिरिक्त समय परीक्षा की तैयारी में लगाना हरेक अध्यापक के अध्यापन काल से जुड़ा कर्तव्य है Iपरीक्षा काल में छात्रों को विषय की गहनता के साथ-साथ अभ्यास कार्य करना उनमें उत्तर लिखकर अभ्यास करने की चेष्टा से अध्यापक छात्रों के लिए गुणवत्ता अभ्यास कार्य पत्रक बनाना, इन सब उत्तर पुस्तिकाओं की जाँच करना, प्राप्त अंकों पर आधारित परिणाम को परिणाम पत्र में भरना, काम में व्यस्त होना आदि इस तरह साल भर छात्रों को पढ़ाकर अगली कक्षा में प्रवेश कराना उनका दायित्व होता है जबकि अध्यापक वर्ग उसी स्थान पर बिना किसी हलचल अगले वर्ग की प्रतीक्षा करते हैं और वही दिनचर्या बन जाता है l
इसी तरह व्यस्त रही एक ईसाई संन्यासिनी लिसी चाक्कालाक्कल जी अध्यापिका से प्रधानाध्यापिका बनीं l वे सेवानिवृत्ति प्राप्त कर चुकी हैंl उन्होंने अपने इस खाली समय के लिए प्रतिज्ञा ली है कि 200 बेघर लोगों को घर स्थापित करके देंगीl वर्ष 2012 में उन्होंने “हम चेलेंज मिशन” आरंभ किया इसके लिए आर्थिक सहायता स्वरूप क्राउडफंडिंग से प्राप्त राशि का उपयोग तीन परिवार के हित में खासकर जिन परिवारों में बेटी है उनका उद्धार में कर रही हैंl
वे अपने इस कार्य से बेहद संतृप्त है कि उन्होंने दो सौ बेघर लोगों की सहायता की हैंl उनके इस कार्य को वैश्विक स्तर की सराहना मिली हैl उन्होंने इंडोनेशिया जैसे भारत से बाहर देश के लोगों की भी मदद की हैंl वे भारत के गरीब माता-पिता की बेटियों की रक्षक बनी हैंl जिन माता-पिता ने बेटी के जन्म होने पर अपने आपको दुर्भाग्यशाली माना है उनकी सहायक हस्त बनी हैंl जिससे लड़कियाँ मान्य जीवन जी सकेl उन्होंने अपने विद्यालय की बेसहारा और आर्थिक कष्ट से जूझने वाली छात्रों के जीवन को भी बचाया हैl उनमें पढ़ने- लिखने तथा अपने पैरों पर खड़े होने की तीव्र इच्छा के साथ-साथ पढ़ाई के लिए फीस भरने, स्कूल यूनिफॉर्म और खानपान में भी आर्थिक सहायता दी हैंl
आर्थिक सहायता राशि के रूप में प्राप्त होती हैं तो कई लोग भूमि एवं मकान के लिए आवश्यक सामग्री दान देते हैं तो कुछ लोग श्रमशक्ति के स्रोत से उनकी सहायता कर रहे हैंl इन सब सहायक प्रबंधन को जुटाकर देने में समर्थ लिसी जी इन पिछड़े परिवारों को छह सौ वर्ग फुट घर बनाकर देने में विजई हुई हैंl लिसी चाक्कालाक्कल जी इसके अलावा बीस विकलांगों के लिए भी मकान बनवा रही हैंl उनके दृष्टिकोण के अनुरूप उन्होंने अपने अध्यापन काल में छात्रों को देश की संस्कृति के उद्बोधन को आपस में बाँटने तथा समझने में बढ़ावा दिया है l
उन का मन समाज के लोगों में समता लाना है l आर्थिक कष्ट अनुभव करने वाले स्वयं के लिए भोजन माँगकर, अंतर्मन को कूट-कूट कर जीते हैंl उनकी मानसिक वेदना को समझने में सक्षम व्यक्तित्व ही सफल हो सकता हैl उनके अंदर लोक कल्याण की भावना भी हैl इसी कारण अन्य देश के पिछड़े परिवार को उभार रही हैंl अशक्त, बेघर तथा गरीब परिवार के लोगों को सहारा देने में तन- मन से लगी लिसी चाक्कालाक्कल जी के प्रति हर भारतीय को गर्व हो रहा है l ऐसा लगता है मानो हमारे देश में मदर टेरेसा का पुनर्जन्म हुआ हैl उनका मुख्य उद्देश्य दीन – दुखी आदमी भी प्रतिष्ठित जीवन जी सकें l लिसी चाक्कालाक्कल जी अपने जीवन यात्रा में अति प्रशंसनीय कार्य करती हुई बढ़ रही हैं और उनके गुण समाज – देश के लिए एक मिसाल हैं l
Written by Jayaajitan.
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