मन नहीं माना, मन को
नहीं जाना l
माना तो किसने माना, यह
नहीं जाना।
मन ही मन की मनमानी,
नहीं जाना ।
मन तो सपनों का पुतला है,
नहीं जाना ।।
मनमौजी मेरा है वेश,
नहीं जाना ।
चंचलता बेरहमी ही लाती
नहीं जाना।।
दिन गुजरे लक्ष्यहीन में,
नहीं जाना।
गुजरे दिन नहीं आयेंगे,
नहीं जाना।।
Penned by Jayaajitan.
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