कविता: किसकी आत्मा ?

अंधेरी रात, मैं अकेली, 

 बिजली थी  गुल ।

सामने चमकती दो आँखें,

आँखें फैलाकर देखा ।

उन चमकती आँखों का आगमन,

पीछे-पीछे रखे कदम,

धक-धक करता मेरा दम,

हारे मन से ज़मीन पर बैठी।

आह! छलाँग करती वो आँखें, 

आ बैठी मेरी गोदी में ।

कराहती रही कि जकड़ लिया,

मुझे किसी आत्मा ने ।

पर वो थी मेरी प्यारी बिल्ली की आत्मा,

जो दौड़ी आई थी देने मेरा साथ।

Written by Jayaajitan.

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