फेसबुक पर मैंने एक वायरल वीडियो देखा। वह वीडियो महारानी टेक्सटाइल्स द्वारा साझा किया गया। वीडियो की शुरुआत दुकान के नाम न दर्शाते हुए, पच्चीस साल की एक सुंदर लड़की की ओर कैमरा बढ़ा। वह लड़की महारानी टेक्सटाइल्स की सेल्स गर्ल की यूनिफॉर्म साड़ी में थी। बैज पर उसका नाम लिखा हुआ था- नित्या राज एस. । उसका मुस्कराता चेहरा निष्कलंक – सा लगा । उसे देखते ही लगा कि वह बहुत ही मासूम है। फिर भी उस मुस्कुराते चेहरे पर उदासीनता छुपी थी । प्रसन्नता और उदासी के मिश्रित भावों से भरी नित्या के बारे में जानने की थोड़ी जिज्ञासा हुई। मेरी जिज्ञासा को आह्लाद ने आकार दिया ।
वीडियो में अगले क्षण महारानी टेक्सटाइल्स की सेल्स गर्ल्स को दिखाया गया। उनमें से एक ने नित्या की आँखों पर पट्टी बाँधी जिसे देखकर मुझे लगा कि उसके साथ मज़ाक किया जा रहा है। पर वही लड़की ने उसका हाथ पकड़कर उसे सड़क किनारे ले गई। फिर धीरे से उस पट्टी को खोला गया। सबने उसे एक विशाल विज्ञापन बोर्ड की ओर इशारा किया। वीडियो में विज्ञापन ज़ूम करने पर नित्या की तस्वीर दिखी। बोर्ड पर खुद को देखकर वह हैरानी और विस्मय से उसे निहारने लगी। नित्या अपने ही चेहरे को देखकर भ्रमित थी इसलिए बार-बार पलक झपक कर देख रही थी। सारी लड़कियों ने नित्या को यह विश्वास दिलाने के लिए कहा कि वह अब एक बहुत बड़ी मॉडल और सेलिब्रिटी बन गई है। अविश्वसनीय आँखों से देखती नित्या बार- बार विज्ञापन बोर्ड पर देखकर “हूँ – हूँ ” कहती रही। तब समझ आया कि नित्या बहरी है और वह अंगीय भाषा में धन्यवाद कह रही थी । मैं भी नित्या की तरह खिल उठी क्योंकि दुकान के मालिक ने होर्डिंग पर उस सेल्स गर्ल की तस्वीर लगाने से अब वह वीडियो वायरल हो गया है।
कुछ दिन बाद महारानी टेक्सटाइल्स द्वारा दूसरा वीडियो भी वायरल हुआ। उस वीडियो में आठ मई को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के दिन नित्या राज एस. को उपहार के रूप में ‘हियरिंग एड’ प्रदान किया गया और अंग वस्त्र ओढ़ाकर सम्मानित किया गया । महारानी टेक्सटाइल्स की एक सेल्स गर्ल ने वीडियो देखने वालों को इस दृश्य की सच्चाई बताई कि नित्या एक शादीशुदा लड़की है।उसके जीवन में कई चुनौतियाँ हैं। सबसे पहले वह एक बधिर लड़की है जिससे उसे दूसरों के साथ संवाद करने में मुश्किल होती है। साथ ही उसका पति भी मूक – बधिर है। दूसरा वह एक गरीब परिवार से है और आर्थिक रूप से संघर्ष कर रही है। इसी कारणवश वह महारानी टेक्सटाइल्स में काम करने आई है। उसकी छह साल की बच्ची सही – सलामत है। नित्या उस दुकान में आने वाले हर ग्राहक के साथ बड़ी सहनशीलता से पेश आती है । काम के प्रति उसके समर्पण को देखकर हर ग्राहक खुश हो जाता है । दूसरों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहने के कारण वह सबकी प्यारी है। इसके बावजूद जब वह सांकेतिक भाषा में अपनी बात रखती है, तब उसकी शारीरिक अशक्तता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। नित्या की यह अवस्था देखकर देखने वालों का मन पिघल जाता है। हर ग्राहक के मुख से यही सुनने को मिलता था कि भगवान ने उसे सुंदर रंग-रूप तो दिया है और वह एक संस्कारी लड़की भी है, किंतु ईश्वर ने उसे बोलने-सुनने की क्षमता से दूर रखा है। इस बात को सुनकर दुकान के मालिक और दूसरे कर्मचारियों ने मिलकर नित्या के लिए हियरिंग एड (सुनने की मशीन) खरीदी और महिला दिवस के दिन यह उपहार भेंट किया। उसे ‘हियरिंग एड’ पहनाकर उसकी सहेलियों ने पूछा, “क्या सुनाई दे रहा है?” उसने सिर हिलाते हुए ‘धन्यवाद’ कहा। इसकी सारी सहेलियाँ बहुत गदगद हुईं और आँखों से हर्ष के आँसू बहाने लगीं ।
मनुष्यता के साधु भाव का मनोहर दृश्य सिनेमा से हटकर वास्तविक जीवन में देखने-सुनने को मिले तो यही दर्शाता है कि हमारा भारतीय समाज सबसे गहरी आस्थाओं का घर है। भारतीय समाज में मनुष्य के प्रति स्नेह तथा दया इन दोनों के परस्पर समन्वय से मनुष्यता का भाव उठ खड़ा होता है। जो मनुष्य जाति से परे केवल मानव पात्र के रूप में स्त्री-पुरुष की परिगणना करते हुए इस भूमि पर जन्म लेते रहे हैं, वे आज भी हमारी इस पवित्र माटी पर अपने आप को आगे बढ़ाने से अधिक दूसरों को आगे बढ़ाने में लगे हैं। ऐसे लोगों के श्रेष्ठ कार्यों को देखकर नतमस्तक होने के लिए कई वृत्तांत हैं। उनके कुछ कार्य हमारे लिए प्रेरणादायक बन जाते हैं, जिन्हें उजागर करना एक तरह से मनुष्य का धर्म भी बनता है। ऐसे धर्मपालक द्वारा साझा की गई वीडियो को दर्शकों ने लाइक्स देकर अपनी सराहना व्यक्त की है।
आज नित्या का भविष्य सुरक्षित हो गया है। उसे किसी के सामने अपनी दिव्यांगता का आक्षेप सुनना नहीं पड़ेगा। उसे भी आम लोगों की तरह जीने का अधिकार मिल गया है। दरअसल, यह अधिकार महारानी टेक्सटाइल्स के मालिक व सहकर्मियों की शुभकामनाओं के कारण मिल पाया है। इसके अलावा, नित्या को अपनी ही दुकान का मॉडल बनाकर उसे सितारा बना दिया है। एक बेसहारा लड़की को सहारा देकर उसे दुनिया के सामने सिर उठाकर जीने के लिए सक्षम बनाया है। ऐसे में महारानी टेक्सटाइल्स के मालिक तथा वहाँ के कर्मचारियों ने मानवता के माध्यम से मानवीय मूल्यों और परोपकारिता को केवल कहानी-कविता में बंद पंक्तियाँ न रहने देकर उसे हकीकत में बदलने का महनीय कार्य किया है। इसलिए महारानी टेक्सटाइल्स के मालिक और कर्मचारियों को सलामी की आवश्यकता है। निःसहाय को बलशाली और अशक्त को सशक्त बनाने का ‘तंत्र-मंत्र’ मानव के पास है, बस आवश्यकता है तो उसके सही उपयोग की। अंततः हर मनुष्य को अपने सामर्थ्य का उपयोग दूसरों के हित में करने के लिए तैयार रहना चाहिए और दूसरों के लिए मार्गदर्शक बनना चाहिए ।
Penned by Jayaajitan.
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