लेख : स्वर्गीय सिंगीथम श्रीनिवास राव  

“भारतीय सिनेमा” ने अपनी अनूठी पटकथा, जीवंत संवाद, सुमधुर संगीत और कलात्मक निर्देशन के बल पर वैश्विक पटल पर एक विशिष्ट पहचान बनाई है। इसी गौरवमय यात्रा के दौरान 1985 के हिंदी सिनेमा ने “नाचे मयूरी” (मूल भाषा तेलुगु) में बैसाखी (कृत्रिम पैर) के एक अद्वितीय एवं सुंदर नृत्य प्रस्तुति दर्शाकर सिनेमा जगत पर अमिट छाप छोड़ी थी। इसके अलावा कालजयी फिल्मों में बिना डायलॉग वाली फ़िल्म ‘पुष्पक’ (1987) का जोखिम उठाना, 90 के दशक में टाइम-ट्रैवल पर बनी शानदार फ़िल्म ‘आदित्य 369’ का निर्देशन या फिर 1989 में बौने व्यक्ति पर आधारित कॉमेडी-ड्रामा ‘अपूर्व सहोदरंगल’ जैसे फिल्मों के निदेशक माननीय सिंगीथम श्रीनिवास राव के कई भाषाओं में अपनी दूरदर्शी और अनोखी फ़िल्मों के लिए महारत पाने वाले अब वे हमारे बीच नहीं रहे।

दूरदर्शी फ़िल्म निर्माता, पटकथा लेखक, प्रोड्यूसर और संगीतकार सिंगीथम श्रीनिवास राव का तीन  अक्टूबर को चेन्नई के एक निजी अस्पताल में पंचानबे साल की उम्र में निधन हो गया। सात दशकों से ज़्यादा लंबे करियर में, कन्नड़ और तेलुगु में अपनी फ़िल्में बनाने के बाद  उन्होंने तमिल, मलयालम, हिंदी और अंग्रेज़ी जैसी कई भाषाओं में बेहतरीन फ़िल्में निदेशन किए । कन्नड़ फ़िल्मों में उनकी यात्रा निदेशक बनने से पहले ही शुरू हो गई थी । सिंगीथम, यू.आर. अनंतमूर्ति के उपन्यास पर आधारित पट्टाभि राम रेड्डी की यादगार फ़िल्म ‘संस्कार’ (1970) के कार्यकारी निदेशक थे। इस फ़िल्म ने बेस्ट फ़ीचर फ़िल्म का नेशनल फ़िल्म अवॉर्ड जीता और यह कन्नड़ समानांतर सिनेमा की एक अहम फ़िल्म बन गई।

कन्नड़ सिनेमा में उन्होंने 1982 में राजकुमार के साथ ‘हालु जेनु’ से निदेशक के तौर पर शुरुआत की। इसके बाद ‘चलिसुवा मोदाफ़ालु’, ‘एराडु नक्षत्र हालु’, ‘श्रवण बंथु’, ‘ज्वाला मुखी’, ‘भाग्यासा लक्ष्मी बरम्मा’, ‘देवता मनुष्य’ (डॉ. राजकुमार की 200वीं फ़िल्म), शिव राजकुमार के साथ ‘आनंद’ और राघवेंद्र राजकुमार के साथ ‘चिरंजीवी सुधाकर’ जैसी फ़िल्में आईं। इन्हें डॉ. राजकुमार के तीसरे पुत्र पुनीत राजकुमार को बाल

पात्र के तौर पर प्रसिद्धि दिलाने का श्रेय भी जाता है। वे फ़िल्में पारिवारिक नाटक, प्रेम कहानी, अपराध और हास्य जैसी शैलियों की थीं, जिनमें सिंगीथम ने प्रत्येक के अनुकूल अपनी कला का उपयोग किया। लेकिन 1987 में आई ‘पुष्पक विमान’ उनकी सबसे बेहतरीन फ़िल्म साबित हुई बिना संवाद वाली यह फ़िल्म अपने समय की सबसे अनोखी फ़िल्मों में से एक थी। इसमें सदाबहार नायक कमल हासन थे और इस फ़िल्म ने भरपूर मनोरंजन के लिए “बेस्ट पॉपुलर फ़िल्म” का “नेशनल अवॉर्ड” जीता। मशहूर संगीतकार एस. राजेश्वर राव के शिष्य होने के नाते उन्होंने कन्नड़ सिनेमा को कुछ यादगार एल्बम और गाने दिए। उन्होंने ‘भाग्यादा लक्ष्मी बरम्मा’ के लिए गाने और स्कोर कंपोज़ किए और ‘संयुक्त’ के लिए एक अमर गीत भी बनाया।

तेलुगु फिल्म उद्योग में टाइम ट्रैवल पर आधारित साइंस-फ़िक्शन फ़िल्म ‘आदित्य 369’, शानदार फ़ैंटेसी फ़िल्म ‘भैरव दीपम’ और बायोग्राफ़िकल ड्रामा ‘मयूरी’ जैसी फ़िल्में अपनी – अपनी शैली से हटकर बनी बेहतरीन कृतियाँ थीं ।  इन्हीं फ़िल्मों की वजह से फ़िल्म इंडस्ट्री ने उन्हें ‘सेल्युलाइड साइंटिस्ट’ का नाम दिया।

तमिल में उन्होंने 1974 में दिक्कत्र पार्वती, 1981 में राजा पर्व (कमल हसन की 100वीं फिल्म), 1987 में पेसुन पदम, 1989 में अपूर्वा सहोदरांगल, 1990 में माइकल मदाना काम राजन, मगलिर मट्टम 1994, 1995 में चिन्ना वाथियार, 1998 में कथला कथला, लिटिल जॉन का निर्देशन किया है। 2001 में, 2005 में मुंबई एक्सप्रेस । 94 साल की उम्र में उनकी रचनात्मक चमक ‘सिंग गीतम’ नामक एक बहुभाषी संगीतमय फिल्म में आई जो उनकी आखिरी फिल्म थी।

शुरुआत में उन्होंने मशहूर क्लासिकल तेलुगु फ़िल्म ‘माया बाज़ार’ में निदेशक के.वी. रेड्डी के साथ काम किया। सिंगीथम ने भारतीय सिनेमा की सीमाओं को तब और आगे बढ़ाया, जब न तो आधुनिक तकनीकी ने इसे आसान बनाया था और न ही उच्च-अवधारणा वाली लोकप्रिय फिल्में। उन्होंने कहानी कहने के नए तरीकों को बढ़ावा दिया और  ऐसी विधा पर बेहतरीन काम किया जो भारतीय सिनेमा के लिए बिल्कुल नई थी । इस तरह उन्होंने एक ऐसे दूरदर्शी के तौर पर अपनी पहचान बनाई जो अपने समय से काफी आगे थे।

उन्होंने मलयालम और अंग्रेज़ी समेत कई भाषाओं में 61 फ़िल्में निर्देश किए थे । सिंगीथम श्रीनिवास राव का जन्म 21 सितंबर 1931 को आंध्र प्रदेश के नेल्लोर ज़िले के गुडूर गाँव में हुआ था। उनके परिवार में उनके बच्चे और पोते-पोतियाँ हैं। उनकी पत्नी लक्ष्मी कल्याणी जो अक्सर फ़िल्म की पटकथा में उनकी मदद करती थीं और जिनके साथ उनका छः दशकों से ज़्यादा का साथ रहा और उनका निधन 2022 में हो गया था।

सिंगीथम श्रीनिवास राव के निधन के साथ भारतीय सिनेमा ने एक महान निदेशक को खो दिया है जिनकी दूरदर्शी सोच उनके समय से बहुत आगे थी।

 Penned by Jayaajitan.

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