सवेरे उठकर नल खोला तो पानी की धार बहुत बहुत तेज थी, पानी की बर्बादी के डर से मैंने टंकी बंद कर दी। गर्मी इतनी बढ़ गई थी कि सबका कहना था – “पावर शट डाउन” होगा पर ऐसा नहीं हुआ। तीन महीने तक भरपूर बिजली मिलती रही । सचमुच, विद्युत (बिजली) गर्मी को मात देने में कामयाब रही । चौथे महीने में घमासान वर्षा हुई पर कहीं भी जलभराव नहीं दिखा क्योंकि सड़कों पर एक भी गड्ढ़ा नहीं था। देखते – ही-देखते सारा पानी सीधे ड्रेनेज में चला गया। वाह ! सड़क पर जल-जमाव का तो सवाल ही नहीं उठा । सड़कों के किनारे पैदल चलने वालों को अब यह भय नहीं रहा कि चलती गाड़ियों से कीचड़ या पानी की छींटे उनके ऊपर पड़ेंगे और साथ ही कहीं भी चक्का जाम भी नजर नहीं आया ।
भारतभर में सड़क दुर्घटनाएँ न के बराबर हो रही हैं । लोग सड़कों पर अपना-अपना वाहन संभालकर चला रहे हैं । हर किसी ने जल्दबाज़ी की प्रवृत्ति को त्याग दिया है और दूसरों की सुरक्षा हेतु गाडियों को तेज़ गति में नहीं चलाया जा रहा है । बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन आदि जगहों पर लोग बहुत संयम रख रहे हैं। इन सार्वजनिक स्थलों में कोई धक्का-मुक्की नहीं होती है बल्कि सब एक कतार में खड़े रहते हैं जो कि बेहद अनोखा दृश्य है। देश के सभी युवाओं को पढ़ाई पूरी करते ही अच्छा – खासा वेतन वाली नौकरी मिल रही है जिससे वे विदेशी नौकरियों के प्रति आकर्षित नहीं हो रहे हैं । अब युवाओं को परीक्षा में अच्छे अंक मिल रहे हैं जिससे उनमें निराशा और आत्महत्या जैसी प्रवृत्तियाँ समाप्त हो गई हैं ।
अस्पतालों में चिकित्सकों को भगवान का रूप माना गया है क्योंकि वे मरीजों की देखभाल अपने परिवार के सदस्य की तरह करते हैं। सरकारी अस्पतालों की सफाई बहुत ही अच्छी होने के कारण वहाँ के फर्श पर भी बैठा जा सकता है। स्वच्छता के प्रति जागरूक लोग सड़कों और गलियों में कूड़ा – कचरा नहीं फेंकते जिससे हमारा राष्ट्र संक्रमण से सुरक्षित रहता है और चारों ओर शुद्ध पर्यावरण रहता है । किसान अपने खेतों में बिना रासायनिक खाद के प्रयोग से अन्न उगा रहे हैं । इसलिए फल, सब्जी इत्यादि समय से पूर्व पकाने तथा खाद्य पदार्थों में कोई मिलावट न करने से आदमी स्वस्थ तथा चुस्त है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि अन्न की बर्बादी नहीं हो रही है। जितनी आवश्यकता है उतना ही भोजन थाली में लिया जा रहा है। सड़कों पर कोई बेसहारा भूखा आदमी नहीं रहे। कहा जाए तो सबके पास जीवनयापन के आवश्यक साधन होने के कारण ही हमारा राष्ट्र अभावों से मुक्त होकर निरंतर उन्नति की ओर अग्रसर है। ऐसी सकारात्मक सोच वालों की कृपा से समाज की हर समस्या का समाधान हो रहा है।
“स्वर्ण काल” की परिकल्पना लिए नागरिक आदर्श और समृद्धि हमारी राष्ट्र वसुंधरा की सुंदर भूमि का अटूट अंश हैं जहाँ ईमानदारी और सामाजिक समानता को सर्वोपरि माना जा रहा है । लोग अपने धर्म की मान- मर्यादा को बनाए रखने के लिए मानवीय मूल्यों की राह पर चल रहे हैं। इसलिए देश कहीं रुक नहीं रहा है, बल्कि निरंतर आगे बढ़ रहा है और संपूर्ण जगत में भारत की जनता की जय-जयकार हो रही है । सार्वजनिक पदों पर बैठे व्यक्ति अपने कर्तव्यों को सेवक के रूप में स्वीकार कर पूरी पारदर्शिता से काम कर रहे हैं। यही कारण है कि हम सफलता का परचम लहरा पा रहे हैं। इसमें कोई संशय नहीं है कि मेरी तरह हमारे राष्ट्र के हर व्यक्ति एक आदर्श “स्वर्ण काल” की कल्पना अवश्य कर रहा होगा ।
Penned by Jayaajitan.
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