मैसूर शहर ‘नादा हब्बा’ (राज्य उत्सव) की भव्यता में डूबने के लिए तैयार है। 2026 का दशहरा राजसी वैभव, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और नए आकर्षणों का अनूठा संगम होगा, जिसमें पूरे शहर रोशनी से चमक उठेगा, इसके अतिरिक्त एक बड़ा ड्रोन शो और पहली बार कंबाला (भैंसों की पारंपरिक दौड़) इस साल के उत्सव के मुख्य आकर्षण होंगे।
मैसूर ज़िले (जिसे ‘सांस्कृतिक शहर’ और ‘महलों का शहर’ भी कहा जाता है) की चामुंडी पहाड़ियों पर स्थित श्री चामुंडेश्वरी देवी मंदिर में दशहरा उत्सव के 417वें संस्करण की शुरुआत हुई। इस कार्यक्रम का उद्घाटन कोप्पल तालुक के श्री गवी मठ के श्री अभिनव गविसिद्धेश्वर महास्वामीजी ने किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद थे। इस साल का दशहरा इसलिए भी विशेष है क्योंकि मुख्यमंत्री के तौर पर डी. के. शिवकुमार के लिए यह पहला दशहरा उत्सव है। सदियों पुराने इस उत्सव के इतिहास में पहली बार, उद्घाटन समारोह में अलग-अलग धर्मों के 200 से ज़्यादा धर्मगुरु शामिल हुए। यह पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ-साथ इस आयोजन में अलग-अलग धर्मों की भागीदारी बढ़ाने की कोशिश को दर्शाता है। ग्यारह दिनों तक चलने वाले इस उत्सव का मुख्य आकर्षण 21 अक्टूबर को विजयादशमी के दिन निकलने वाला दशहरा जुलूस है, जिसमें मैसूर पैलेस से बन्नी मंटप मैदान तक लोगों की भारी भीड़ के बीच सजे-धजे हाथी पर सोने का हौदा ले जाया जाता है।
पिछले साल बुकर पुरस्कार जीतने वाली बानू मुश्ताक को मैसूर दशहरा उत्सव का उद्घाटन करने के लिए आमंत्रित किए जाने पर राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया गया था। हालांकि सरकार इस साल दादा साहब फाल्के पुरस्कार विजेता श्री अनंतनाग को फेस्टिवल का उद्घाटन करने के लिए बुलाने पर विचार कर रही थी, लेकिन उनके कथित दक्षिणपंथी झुकाव के कारण कांग्रेस के भीतर इस फैसले को लेकर तनाव उत्पन्न किया गया था।
इस साल गावी मठ के प्रमुख श्री गावी सिद्धेश्वर स्वामी द्वारा दशहरा उत्सव का उद्घाटन किए जाने के निर्णय में उनके सामाजिक कार्यों की तुलना में राजनीतिक समीकरणों को अधिक महत्त्व दिया गया प्रतीत होता है। पिछले दो दशकों से भी अधिक समय से वे टकराव और विवादों से दूर रहे हैं और निस्वार्थ सेवाओं से अपने गुरु के आदेश का पालन करते रहे हैं। उन्होंने संस्थाओं, समुदाय की भागीदारी और निरंतर सेवा के माध्यम से यह साबित किया कि दयाभाव से से भी बड़ा सामाजिक बदलाव लाया जा सकता है। वे साधु-संतों के विचारों को चुनौती देते हुए धार्मिक अनुष्ठान और आध्यात्मिक प्रवचन के साथ-साथ आम जनता के बीच रहकर उनके सुख-दुख में शामिल होते हैं। वे अपने कंधों पर निर्माण सामग्री ढोते हैं और शौचालय भी साफ़ करते हैं। एक प्रबुद्ध पाठक के रूप में उनकी बौद्धिक जिज्ञासाएँ मुख्यतः धर्मग्रंथों, भाषा-विज्ञान, मानविकी, सामाजिक विज्ञान और नैतिक दर्शन से जुड़ी हैं।
साथ ही, मैसूर दशहरा की ऐतिहासिक शाही परंपराएं भी जीवंत हो उठेंगी, क्योंकि वाडियार परिवार मैसूर महल में नवरात्रि का अपना निजी उत्सव मनाते हुए शाही रीति-रिवाजों को कायम रखेगा।
मैसूर के शाही परिवार के वंशज और मैसूर से मौजूदा सांसद यदुवीर कृष्णदत्त चामराजा वाडियार, पारंपरिक “खास दरबार” के आयोजन के लिए महल के दरबार हॉल में मौजूद मशहूर सुनहरे सिंहासन पर विराजमान होंगे।
इस त्योहार का आध्यात्मिक महत्त्व देवी चामुंडेश्वरी की पूजा से जुड़ा है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार उन्होंने महिषासुर का वध किया था। इसी राक्षस के नाम से मैसूर की उत्पत्ति की पारंपरिक कथा से जुड़ी है । जो नौ दिनों के नवरात्रि का समापन विजयादशमी के साथ होता है। इस पर्व को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता।
मैसूर महल इस उत्सव का मुख्य आकर्षण है। सोने के सिंहासन को सजाना, शाही दरबार की परंपराएं, आयुध पूजा और शाही प्रतीकों की पूजा आज भी जीवित है जो इस त्योहार को वाडियार वंश के इतिहास से जोड़ती हैं। हर शाम रोशनी से जगमगाने वाले इस महल में उत्सव के दौरान हज़ारों पर्यटकों के आने की उम्मीद है। इस साल का खास आकर्षण ‘ड्रोन शो’ है, जो पारंपरिक मशाल जुलूस के साथ-साथ त्योहार में टेक्नोलॉजी से जुड़ा एक नया आकर्षण जोड़ता है। एक और खास चीज़ है ‘कंबाला’ – तटीय कर्नाटक की पारंपरिक भैंसों की दौड़ – जो पहली बार 18 और 19 अक्टूबर को विश्वेश्वरैया टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी कॉलेज के पास आयोजित की जा रही है। इसे शामिल करने से त्योहार के खेल कार्यक्रमों का दायरा बढ़ा है, हालांकि पानी के इस्तेमाल को लेकर भी सार्वजनिक बहस हो रही है। इस कार्यक्रम में भैंसों की लगभग 150 से 160 जोड़ियों के भाग लेने की उम्मीद है। इस आयोजन के लिए आउटर रिंग रोड पर सटागल्ली के पास 145 मीटर लंबा ट्रैक बनाया गया है, जिस पर अनुमानित 8 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। दशहरा एयर शो एक और मुख्य आकर्षण है। अईएएफ की सूर्य किरण एरोबैटिक टीम 18 से 20 अक्टूबर तक अपना प्रदर्शन करेगी। हर साल की तरह, रोशनी की सजावट सबसे बड़े आकर्षणों में से एक होगी; 11 से 31 अक्टूबर तक 21 दिनों के लिए 199 सड़कों, 123 चौराहों और 80 जगहों पर रोशनी की जाएगी, जिसमें लगभग 164 किलोमीटर लंबी सड़कों पर दशहरा स्पेशल लाइटिंग होगी। बड़ी संख्या में पर्यटकों के आने की उम्मीद को देखते हुए, सुरक्षा व्यवस्था पर नज़र रखने के लिए लगभग 5000 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं, पुलिस हेल्प डेस्क बनाए गए हैं और भीड़ व ट्रैफ़िक मैनेजमेंट के लिए ड्रोन कैमरे और सीसीटीवी उपकरण लगाए गए हैं।
इस साल के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में युवा दशहरा, महिला और मक्कले दशहरा, फूलों और फलों की खरीदारी, जंबो सवारी और दशहरा प्रदर्शनी जैसे कई आयोजन शामिल हैं।
Penned by Jayaajitan.
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