राजकीय पुरातत्व केंद्र का कार्यालय बहुत पुराना भवन था, इसकी दीवारें पुरातत्व के इतिहास की मूक गवाह थीं। लेकिन कार्यालय की शान-शौकत ने हमेशा इस कार्यालय की प्राचीन आत्मा को ढक रखा था। कार्यालय की हर मेज और कुर्सी पर सालों तक खरोंच के निशान नहीं थे क्योंकि इतिहास के निर्माण ने उन पर कड़ी मेहनत के रंग भर दिए थे। कार्यालय की अधिकारी श्रीमती अनीता सोनी हर चीज का ध्यान रखना और उसे व्यवस्थित रखना अपना कर्तव्य समझती थीं। केंद्र सरकार ने उन्हें प्रशंसा पत्र और अन्य सम्मान दिए थे। वे सभी सम्मान उनके शोध के लिए थे। श्रीमती अनीता सोनी के कार्यकाल में कार्यालय की बत्ती रविवार को भी जलती रहती थी। वे हमेशा तय समय से पहले ही अपना काम पूरा करके अपनी कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देती थीं।
अपने कर्तव्य का निर्वहन करने में सर्वश्रेष्ठ होने के कारण उनका सारा काम तय समय से पहले ही पूरा हो जाता था। वे इस बात का पूरा ध्यान रखती थीं कि उनकी इसका असर दूसरे कर्मचारियों पर न पड़े। श्रीमती अनिता सोनी के देरी से आने के कारण उसी कार्यालय के उनके वरिष्ठ अधिकारी श्रीजीत को प्रतिदिन गुस्से में ऊँची आवाज में बोलते सुना जाता था। लेकिन फिर भी वे प्रतिदिन आधे घंटे से एक घंटे तक देरी से कार्यालय आती थीं । क्योंकि वे हर दिन अपने घर से सड़कों पर आवारा कुत्तों के लिए बड़े-बड़े डिब्बों में खाना लाती थीं और उन्हें खिलाने के बाद ही कार्यालय पहुँचती थीं । आज कार्यालय में श्रीमती अनिता सोनी अपनी कुर्सी पर बैठी कुछ पुरानी घटनाओं को याद करके उन्हें एक खाली कागज पर लिख रही थीं । बीच-बीच में वह पंक्तियाँ भी याद कर रही थीं । तुरंत श्रीमती अनिता सोनी ने फोन उठाया और बोलीं, “सलीम सर! भोजन की व्यवस्था बहुत बढ़िया होनी चाहिए, स्वादिष्ट भोजन का आनंद लेना आपकी शान है, यह मैं जानती हूँ, फिर भी आपको याद दिलाना चाहती हूँ कि मैं ऐसे भोजन की अपेक्षा करती हूँ जिससे मेरे मेहमान भोजन की तारीफ करते रहें। कृपया इस बात का ध्यान रखें, सलीम सर।” यह कहते हुए श्रीमती अनिता सोनी अपना फोन रख देती हैं और खुद से कहती हैं, “परसों इस ऑफिस से मेरा रिश्ता हमेशा के लिए टूट जाएगा, यह मेरे जीवन का आखिरी कार्य दिवस होगा, मैं रोऊँगी, नहीं रोऊँगी, मैं उस दरवाजे से एक मुस्कान के साथ विदा लूँगी जो उम्मीद की लौ जलाती है ताकि मेरे पीछे आने वालों को यह दृढ़ विश्वास हो कि रिटायरमेंट का मतलब जीवन का अंत नहीं बल्कि एक खूबसूरत जीवन की शुरुआत है, यह बिना किसी बाधा के एक स्वतंत्र पक्षी की तरह उड़ने का समय है, यही मेरे अंतिम शब्द भी होने चाहिए।” यह कहते हुए श्रीमती अनिता सोनी अपनी भावनाओं में डूब गईं और सुंदर लिखावट में लिख गईं।
सुबह-सुबह ऑफिस के चपरासी रवि ने ऑफिस के चारों ओर कागज की मालाएँ लगानी शुरू कर दीं, इस बीच ऑफिस के अन्य कर्मचारी भी ऑफिस को सजाने में लग गए। उन्होंने अपना योगदान देना शुरू कर दिया। रमेश ने अपने बैग से फूलों का एक सुंदर गुलदस्ता निकाला और उसकी ओर देखते हुए कहा, “अनीता मैडम जी, आपने मुझे रविवार को भी बुलाया और काम करवाया लेकिन मैं आपसे नाराज नहीं हूँ, मैंने आपके साथ काम किया और आपको पुरस्कार मिला था लेकिन आपने मुझे उसका श्रेय भी दिया, मैं यह सब कैसे भूल सकता हूँ ।” इस बीच रीना ने रेशमी चादर मेज पर फैला दी और बोली, “देखो रमेश, यह रेशमी चादर मैडम ने दी है, जब वे कश्मीर गई थीं तो मेरे लिए चादर लाई थीं, उनकी याद में मैंने यह चादर उनके सामने रखी है।” रमेश ने गुलदस्ता मेज पर रखते हुए कहा, रीना मैडम आप रेशमी चादर से उनकी यादों को ताजा कर रही हैं, मैं फूलों के गुलदस्ते से यादें प्रकट कर रहा हूँ । जब वे सिंगापुर गई थीं तो उन्होंने वहाँ से यह खरीदकर मुझे उपहार में दिया था। मैडम ने मुझे सिर्फ फूलों का गुलदस्ता ही नहीं बल्कि और भी बहुत कुछ दिया है।” रीना ने कहा, “मैडम मुझे हर बार कुछ न कुछ देती रहती हैं।”
वरिष्ठ अधिकारी श्रीजीत हाथ में चाय का प्याला लेकर वहाँ आए और पूछा, ” आप लोगों ने क्या किया? आज से ऑफिस को सजाना शुरू कर दिया है। यह कार्यक्रम परसों है, उम्मीद है कि आप गलती से ऐसा नहीं कर रहे हैं।” रमेश ने कहा, “नहीं सर, मैं एक दिन पहले ही सजाना चाहता हूँ और मैडम की तरह समय से पहले काम पूरा करना चाहता हूँ ।” वरिष्ठ अधिकारी श्रीजीत ने सिर हिलाया और फिर बोले, “मैडम आज भी निश्चित रूप से देर से आएँगी, इसके लिए मुझे धैर्य रखना होगा, मैं इसका अभ्यास कर रहा हूँ ।” रीना बोली, “सर आप हर बार उन्हें यह कहकर क्यों डराते थे कि आप उन्हें मेमो देंगे और हम भी जानते हैं कि आपने ऐसा कभी नहीं किया।” वरिष्ठ अधिकारी ने शेल्फ से एक किताब निकाली और कहा, “देखिए, इस किताब में मेरा नाम भी है, जबकि मैंने कुछ नहीं किया, मुझे इसके लिए कुछ पुरस्कार भी मिले, मेरा उसमें कोई योगदान नहीं था, लेकिन जब उन्हें सम्मानित किया जाता है, तो वे हमें भी सम्मानित करवाती हैं, वे अनीता सोनी हैं, उनके जैसा शायद ही इस दुनिया में कोई और हो।” सभी ने हाँ में सिर हिलाया, साथ ही कुछ लोगों की आँखें भी भर आईं और सभी अपने काम में व्यस्त हो गए।
हमेशा की तरह आज भी अनिता सोनी देरी से आई। ऑफिस की सजावट देखकर उन्होंने पूछा, “क्या आप लोग मेरे रिटायरमेंट की तैयारी कर रहे हैं?” रमेश ने आगे बढ़कर कहा, “हाँ मैडम”, अनिता सोनी बोलीं, “लेकिन मुझे परसों यहाँ से जाना है लेकिन आप लोग मुझे दो दिन पहले भेज रहे हैं।” रीना बोली, “जैसे आप हर काम समय से पहले निपटा देती हैं, हम भी वही कर रहे हैं, हम सब आज से ही आपकी कमी से जूझने की तैयारी कर रहे हैं।” इसी बीच वरिष्ठ अधिकारी वहाँ पहुँचे तो अनिता सोनी बोली, “सर, मुझे माफ कर दीजिए, मैं आज भी देर से आई हूँ, दरअसल आज कुत्तों के साथ कुछ बिल्लियाँ भी आई थीं और मैं नए मेहमानों को खाना खिलाकर आई हूँ ।” वरिष्ठ अधिकारी श्रीजीत ने कहा, “आपके देरी से आने पर मैंने कोई कड़ा कदम नहीं उठाया क्योंकि मैंने आपके मार्गदर्शन में बहुत कुछ सीखा है, आप तो खुली किताब हैं। हम आपसे सीखने के लिए ही मिलते हैं, हम आपको ऐसे कैसे जाने दे सकते हैं। मैडम, कृपया अपना ईमेल खोलिए, उसमें कुछ समाचार हैं।” श्रीमती अनिता सोनी ने अपना ईमेल खोला, उसमें लिखा था कि सेवानिवृत्ति की आयु अट्ठावन से बढ़ाकर साठ वर्ष कर दी गई है, उसी के अनुसार उनकी सेवा अवधि बढ़ा दी गई है। दो वर्ष के बढ़ाने के बारे में चर्चा चल रही थी। यह पढ़कर वे सोफे पर बैठ गईं और धीरे से बोलीं, “मैंने लंदन के लिए अपनी हवाई टिकट बुक कर ली है। अब मुझे क्या करना चाहिए?” वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “इसे रद्द कर दीजिए।” वहाँ खड़े सभी कर्मचारियों की ओर देखते हुए उन्होंने कहा, “अच्छी खबर है कि मैडम अब दो वर्ष और हमारे साथ रहेंगी। उनका कार्यकाल बढ़ा दिया गया है।”
वरिष्ठ अधिकारी के साथ-साथ कार्यालय में सभी लोग जोर-जोर से तालियाँ बजाने लगे। जैसे ही तालियाँ बजनी बंद हुईं, रमेश ने वरिष्ठ अधिकारी से पूछा, “सर, खाने के इंतजाम के बारे में क्या करें?” उन्होंने कहा, “मैडम के कार्यकाल बढ़ाने की खुशी में पार्टी होगी। ठीक है।” रमेश ऐसा कहकर वहाँ से चला गया। श्रीमती अनिता सोनी अपने केबिन में विचारों में खोई हुई थीं कि उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति की खुशी में खाने का इंतजाम किया था। अब वे अपने कार्यकाल के दो वर्ष बढ़ाने की खुशी में पार्टी करेंगी। इस विचार के साथ उन्होंने बैनर वाले को सेवानिवृत्ति के स्थान पर “दो वर्ष के लिए सेवा अवधि बढ़ाने की खुशियों में आपके संग ” लिखने का निर्देश दिया और अपना काम करने लगीं । इसी तरह कार्यालय में सभी कर्मचारी चुपचाप अपना-अपना काम करने लगे।
Penned by Jayaajitan.
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