लेख : धातुओं का राजा-स्वर्ण

भारतीय संस्कृति में सोने को समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। सोना पीले रंग की एक धातु है जो आँखों को आकर्षित करती है। सोने को शुभ माना जाता है। इसके ऐतिहासिक महत्त्व के कारण राजशाही के समय से ही यह एक प्रदर्शनी की वस्तु रही है। इसीलिए राजा-महाराजाओं में स्वर्ण मुकुट, कंकण, हार,  करधनी इत्यादि पहनने का प्रचलन था।  राजा – महाराजा सोने की थाली, गिलास और बर्तनों का उपयोग करते थे ताकि सोने के सूक्ष्म कणों के सेवन से अपने शरीर को स्वस्थ और बलवान रख सकें। प्राचीन काल के भारतीय राजा अपने महलों और मंदिरों की साज-सजावट में स्वर्ण सामग्री का व्यापक उपयोग करते थे।  राजाओं के सिंहासन भी  सोने के बने होते थे l इसी को आगे बढ़ाते हुए भारतीय समाज के लोग सोने को विशेष स्थान देने लगे। उत्तर भारत के लोग सोने को पसंद करने के साथ – साथ चांदी को भी उतना ही महत्त्व देते हैं । दक्षिण भारत में सोने को लक्ष्मी का प्रतीक मानकर चांदी की तुलना में अधिक महत्त्व देते हैं भले ही इसके आभूषण ज्यादा कीमती हों। इसके अलावा सोने के इस्तेमाल में पैसों की आवश्यकता पड़ने पर उसे गिरवी रखकर काम चलाया जा सकता है।  इसीलिए ज़मीन – जायदाद के साथ-साथ सोने की गिनती भी होती है। प्रायः किसी परिवार में बेटी का जन्म होते ही माता-पिता उसका भविष्य सुरक्षित बनाने के लिए सोना एकत्रित करना शुरू कर देते हैं । शादी-विवाह में सर्वांगीण स्वर्ण विभूषित दुल्हन की मान्यता बढ़ने के कारण सोना एकत्रित करना एक सामान्य आदत बन गई है । इस मूल्यवान सामग्री को एकत्रित करने की  परंपरा विशेषकर दक्षिण भारत में देखी जाती है और सोने के आभूषण खरीदना एक पिता का मुख्य कर्तव्य माना जाता है।

वैसे भी सोने की कीमत हर बार बढ़ती रहती है लेकिन भाव बढ़ने पर भी इस कीमती धातु को हमेशा मंगलमय माना जाता है। दक्षिण भारत की महान परंपराओं में बच्चों के कर्णवेध संस्कार के समय सोने के आभूषण पहनाए जाते हैं।  उसी दिन से सोने के आभूषण खरीदना शुरू करते हैं । उसी तरह जब कन्या ऋतुमती होती है तो घर में रस्म का आयोजन किया जाता है।  इस प्रथा के दौरान सातवें दिन धार्मिक निष्ठाओं के साथ उसे स्वर्ण आभूषण पहनाया जाता है। इस महोत्सव में निकट रिश्तेदारों  द्वारा उपहार के रूप में सोने की बाली, अंगूठी, चूड़ी  देने की परंपरा चली आ रही है।  इसी तरह दक्षिण भारत में लड़कियों की शादियों में सोने को अधिक महत्त्व देने के कारण शादी से पहले ही सोने को तैयार करके रखने की परंपरा को आज भी बनाए रखा गया है। शादियों के दिनों में घर में एकत्रित  पुराने सोने के आभूषणों की जगह माता-पिता अक्सर नए डिज़ाइन के गहने बनवाते हैं। जिन स्वर्णाभूषणों की दुकानों में सुंदर डिज़ाइन तथा ऑफर-पर-ऑफर मिलते हैं, उन दुकानों का नाम बाज़ारों में ऊँचा होता है। सोने की इसी महत्ता के कारण जौहरियों को नए-नए डिज़ाइन बनाने की चुनौती का सामना करना पड़ता है।

कर्नाटक में सोने का मुख्य उत्पादन रायचूर जिले की ह‌‌ट्टी गोल्ड माइंस एवं कोलार गोल्ड फील्ड्स में होता है लेकिन यह घरेलू माँग का बहुत कम हिस्सा ही पूरा कर पाता है। पता चला है कि कर्नाटक के कुछ दूसरे हिस्सों में सोने का भंडार पाया गया है । निजी कंपनियाँ  खनिजों के अन्वेषण और खनन में लगी हुई हैं फिर भी भारत में खनन क्षेत्रों में संसाधनों की कमी और उत्पादन लागत में वृद्धि के कारण सोने के लिए दूसरे देशों पर निर्भर करना पड़ता है। ऐसे में भारत की तुलना में विदेशी देशों में सोने की कीमत कम होने के कारण लोग वहीं से सोना खरीदते हैं  जिनमें मुख्य रूप से दुबई जैसी जगहों से स्वर्णाभूषण खरीदे जाते हैं।  इसलिए ‘स्वर्ण भंडार’ जैसा सपना केवल विदेश यात्रा करने वालों तक सीमित रह गया है।

इससे पहले  कामकाजी गृहिणियाँ अपनी कमाई से सोने के गहने और सिक्के खरीदा करती थीं। पिछले कुछ दिनों से ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष ने दुनिया भर के जनजीवन में उथल-पुथल मचा दी है । मुख्य रूप से सोने के आयात में कमी के कारण आपूर्ति कम हुई है। इस कारण से सोने का दाम बढ़ गया है और कामकाजी गृहिणियों द्वारा सोने के गहने खरीदना आकाश से तारे तोड़ने जैसा हो गया है । इसलिए वे अपने पुराने जेवर बेचकर नए जेवर खरीद रही हैं।  इनकी मदद में कुछ ज्वेलरी शॉप भी साथ दे रहे हैं। वे भी ग्राहकों को जोड़े रखने के लिए कई तरह के डिस्काउंट दे रहे हैं। संभावित है कि सोने की ऊँची कीमतों के कारण महिलाओं द्वारा दूसरी धातुओं की ओर रुख करने से सोने की माँग कम हो जाए। ऐसी स्थिति में शायद सोने के दुकानदार भी कम भाव पर सोना बेचें। इससे भारतीय नारियों के सोने पर सुहागा वाले सपने को पूरा करने का अवसर मिल जाएगा। अब इस आशा में रहना उचित है कि सोने के दाम संतुलित होने पर महिलाओं के लिए निवेश का सुनहरा मौका मिलेगा  जिससे सोने का बाज़ार फिर से चमक उठेगा।

Penned by Jayaajitan.

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