कविता: मन की बातें

शोर करती गाड़ियों के बीच

हम करते चले

अपनी मन की बातें l

न तो मैंने कुछ सुना

न वो कुछ सुन पाए

फिर भी हो रही थीं बातें l

समझ न आई,

वो अधूरी बातें ।

शब्द पिरोए मुकरी बनीं ज्यों,

वो थीं मन की बातें।

Penned by Jayaajitan.

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