रात भर की बरसात से,
से हुआ हर क्षेत्र नम ।
मिट्टी जब गीली हुई,
रास्ते बने दुर्गम ।
हर डगर पर संभलकर ,
जो गिरकर फिर उठे ।
पंक को हराकर मानव,
फिसलन से भी जीते ।।
Written by Jayaajitan.
Please comment to: jayaajitan@gmail.com
रात भर की बरसात से,
से हुआ हर क्षेत्र नम ।
मिट्टी जब गीली हुई,
रास्ते बने दुर्गम ।
हर डगर पर संभलकर ,
जो गिरकर फिर उठे ।
पंक को हराकर मानव,
फिसलन से भी जीते ।।
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