कविता: नहीं हारना

रात भर की बरसात से,

से हुआ हर क्षेत्र नम ।

मिट्टी जब गीली हुई,

रास्ते बने दुर्गम ।

हर डगर पर संभलकर ,

जो गिरकर फिर उठे ।

पंक को हराकर मानव,

फिसलन से भी जीते ।।

Written by Jayaajitan.

Please comment to: jayaajitan@gmail.com

Leave a Reply