कहानी: टूटा हुआ शीशा

महिमा दिन-रात पढ़ाई करती और हमेशा क्लास में अव्वल आती। वह क्लास में सबसे होशियार लड़की थी और इसलिए कोई भी उसका मुकाबला नहीं कर सकता था। अच्छे से अच्छे छात्र भी उससे सीखने और अपने नंबर सुधारने के लिए उसके इर्द-गिर्द जमा हो जाते थे। इसके अलावा पड़ोसी अपने बच्चों को भी उसके नक्शेकदम पर चलने के लिए कहते थे। छोटी-सी उम्र में ही सबकी प्रिय और प्रशंसा का पात्र बन चुकी महिमा कुछ लोगों की दुश्मन भी थी। वे उससे जलते थे। कुछ लोग उसके बारे में बुरा-भला भी कहते थे। महिमा ने दसवीं की वार्षिक परीक्षा में अपने राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त किया था। अखबार में अपना नाम और चित्र छपने पर और सोशल मीडिया पर भी अत्यधिक चर्चा बटोरकर उसने अपने माता-पिता और स्कूल का नाम रोशन किया। हर दिन पत्रकार और टी. वी वाले उसका इंटरव्यू लेने के लिए उसके घर आने लगे। इस तरह महिमा के घर आने वालों की संख्या बढ़ती गई।

उन दिनों महिमा के पिता सोमनाथ के ऑफिस में राधिका नाम की एक नई लड़की की नौकरी लगी। राधिका के पिता शराबी थे। जिसके कारण उसके माता-पिता में आए दिन लड़ाई-झगड़ा होता रहता था, घर की आर्थिक स्थिति खराब हो गई और उसकी पढ़ाई में रुचि खत्म हो गई, इसलिए तभी से उसने नौकरी करना शुरू कर दिया। काम में नई और अनुभवहीन होने के कारण वह कोई भी काम करने से पहले महिमा के पिता सोमनाथ से सलाह जरूर लेती थी। सोमनाथ राधिका को अपनी बेटी महिमा की तरह समझते थे, इसलिए जब भी राधिका काम में कोई गलती करती तो सोमनाथ का उसके कंधे पर हाथ रखकर उसे दिलासा देना आम बात थी, लेकिन राधिका सोमनाथ के स्पर्श का कुछ और ही मतलब समझने लगी। एक दिन किसी कारणवश सोमनाथ ऑफिस नहीं आए। उस दिन राधिका बहुत परेशान थी। उसने सोमनाथ को फोन करके ऑफिस आने के लिए जोर दिया, लेकिन सोमनाथ नहीं आ सके। अगले दिन राधिका ने सोमनाथ से बात नहीं की, जैसे ही सोमनाथ ने राधिका से माफी माँगी, उसने सोमनाथ को गले लगाया और उन्हें बताया कि वह सोमनाथ के बिना ऑफिस में असुरक्षित महसूस करती है। सोमनाथ ने उसे भरोसा दिलाया कि जब तक वे हैं, उसे कोई नुकसान नहीं होगा। यह सुनकर राधिका ने सोमनाथ से कसम ली कि वह कभी भी उसे बताए बिना छुट्टी नहीं लेंगे। उस समय सोमनाथ को अपनी बेटी महिमा की याद आई। वह भी अपने पिता से उसकी हर इच्छा पूरी करने की कसम खाने को कहती थी। इस तरह सोमनाथ ने राधिका को पूरी तरह अपनी बेटी महिमा की तरह ही माना। सोमनाथ से मिली नजदीकियों से राधिका पर प्यार के रंग चढ़ने लगे।

ऑफिस में लोग राधिका और सोमनाथ के बीच प्रेम कहानी बुनने लगे, जिसकी खबर महिमा की माँ तक पहुँच गई। यह जानकर महिमा की माँ बहुत दुखी हुई और एक दिन सोमनाथ को बिना बताए अपने बच्चों को लेकर अपने मायके चली गई। महिमा ने जब अपने पिता की प्रेम कहानी सुनी तो उसके मन में पिता के प्रति नफरत का जाल बन गया। उस जाल में फँसने के कारण महिमा की पढ़ाई प्रभावित होने लगी। वह अपनी पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पा रही थी। जब टीचर क्लास में सवाल पूछती तो वह बेतुके जवाब देने लगती और तब से पूरी क्लास उसका मजाक उड़ाने लगी। टीचर भी महिमा में आए इस बदलाव से परेशान हो गई । महिमा चुपचाप अकेली बैठने लगी। घर पर उसकी माँ ठीक से खाना नहीं बनाती थी और रोती रहती थी। दादी के आशीर्वाद से उसे कुछ खाने को मिल जाता था।

अखबार ने महिमा का नाम छापा जो बारहवीं की वार्षिक परीक्षा में फेल हो गई। यह अजीब बात है कि दसवीं में नंबर लाने वाली महिमा को सभी विषयों में शून्य अंक मिले। क्या महिमा ने दसवीं में नकल की ? अखबारों में उसकी प्रतिष्ठा पर सवाल उठ रहे थे। यहाँ तक कि जो लोग उसे आदर्श मानते थे, वे भी अपने बच्चों को उससे दूर रखने लगे। महिमा शीशे की तरह टूटकर बिखर गई और उसे पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा।

पारिवारिक विवादों में पिस रही महिमा का भविष्य क्या एक और राधिका को जन्म देना है ? या वह कोई नई कहानी गढ़ेगी ?

Written by Jayaajitan.

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