कविता : रावण तो रावण है

मैदान में खड़ा ऊँचा रावण का

पुतला  दहन उठा  ।

दंभी, लोभी, क्रोधी रावण का

अहंकार क्षण भर में धधक उठा ।

इस युग के इंसानी रावण का

संहार करने पुनः आओ तुम ।

कई भयानक रावण आज

इस धरती पर जन्म ले चुके ।

हे पुरुषोत्तम ! बेबस सीता की

मर्यादा को देखो जो लोग धुत्कारते ।

वे  पापी, दुराचारी, निर्लज्ज,

अधर्म की मस्ती में डूब जाते ।

हे राम ! इस धरती से पाप मिटाने

पुनः अवतरित हो जाओ तुम ।

सीता को भी इस धरती पर जीने का

पुनः अधिकार दिलाओ  तुम ।

Penned by Jayaajitan.

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Response

  1. Nageshwar singh Avatar

    विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएँ आपको 🚩🙏🏻 जय सियाराम

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