राम लाल एक नामी पार्टी का कार्यकर्ता था l उसे हर कोई सच्चा, नेकी और उदारशील मानता था l उसके द्वारा दिन-रात पार्टी के लिए काम करने से पार्टी सुचारू रूप से चल रही थी l लोगों को एकजुट करने और हर कार्यक्रम सफल बनाने में उसका ही हाथ था l इसलिए पार्टी के अन्य कार्यकर्ता उसे मान्यता देते थे l वे सब राम लाल को चुनाव में खड़ा करना चाहते थे l पंचायत चुनाव की तारीख की घोषणा होते ही सबके मन में केवल राम लाल का नाम था किंतु उसका नाम घोषित नहीं किया, जबकि पार्टी से किसी तरह का नाता न रखने वाले के नाम की घोषणा हुई l पार्टी वाले आपस में बातें करने लगे- “राम लाल परिवार से बढ़कर पार्टी के लिए काम करता है फिर भी उसे हाशिए में रख रहे हैं l उसकी मेहनत को अनदेखा कर रहे हैं l “
उसी प्रदेश के निजी चिकित्सालय चलाने वाले डॉक्टर शिव शंकर का नाम सामने आया l इससे पार्टी के निचले कार्यकर्ता काफ़ी नाराज़ हुए, सबके मन में पहले से ही डॉक्टर शिव शंकर के प्रति घृणा भाव था l उनके चिकित्सालय के कचरे के ढेर को सड़कों में डालने से राम लाल और उनके साथियों ने डॉक्टर से बहस की थी l तब से डॉक्टर – राम लाल के बीच मनमुटाव था l इस घटना से वाकिफ़ पार्टी के उच्च अधिकारी ने पार्टी के निचले कार्यकर्ताओं को बुलाकर चुनावी कार्य में लगने का अनुरोध किया परंतु सारे कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में मना कर दिया l
कुछ दिन उपरांत राम लाल सारी बातें भुलाकर डॉक्टर के लिए चुनावी कार्य में लग गए l डॉक्टर की जय जयकार करते हुए घर – घर वोट माँगने निकल पड़े पर हर किसी की ज़ुबान से यही सुनने को मिलता था, “यदि तुम चुनाव लड़ते तो अच्छा था, वैसे पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ता तुम हो, तुम्हारा नाम आना चाहिए था l” राम लाल ने मुस्कराकर कहा, वो सब छोड़िए, डॉक्टर के नाम वोट डालकर उन्हें जिताएँ l ” राम लाल को देखकर पार्टी के कार्यकर्ता भी जुट गए l आखिर डॉक्टर ने चुनाव जीता l राम लाल सहित पार्टी के सारे कार्यकर्ता जानते थे कि समाज में इनका दबदबा है इसलिए डॉक्टर की जीत हुई l पार्टी के मुखिया ने राम लाल को पार्टी के कार्यालय में बुलाकर हर बार की तरह फूलों से सजा माला पहनाई और आदर किया l वे राम लाल की प्रशंसा कर रहे थे, डॉक्टर की जीत का कारण राम लाल को ही मानते थे lउन्होंने कहा, “राम लाल,हमने तुम्हें चुनावी मैदान में खड़ा नहीं किया, फिर भी पार्टी जीती, तुम ही इस जीत के हकदार हो ,पार्टी की साँस हो l “ वहाँ खड़े पार्टी के निचले कार्यकर्ता आपस में फुसफुसा रहे थे – “ये बड़े लोग जानते हैं, राम लाल के बिना पार्टी आगे नहीं चलेगी, उसे पार्टी का कार्यकर्ता बनाकर रखा है ताकि पार्टी की नींव उखड़ न जाएँ l “ परंतु उनकी बातों का राम लाल पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। वह पूर्ववत पार्टी का काम मन लगाकर करता रहा। पार्टी पर उसका दबदबा बरकरार रहा।
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