पहाड़ी प्रदेश देखने में अति मनोरम स्थल हैl हम इसकी महिमा कविताओं में या कहानियों में पढ़ते- सुनते हैं l इन प्रदेशों में रहने वाले मनुष्य जीवन की खोज – खबर शायद ही करते होंगे क्योंकि वे सब पहाड़ी प्रदेश के आवरण से बाहर नहीं निकलते हैंl आधुनिक काल में हो रहे परिवर्तनों से बिल्कुल अनभिज्ञ हैंl देखा जाए तो गाँव में रहने वाले प्रायः युवा वर्ग अपने जीवनचर्या के हित में शहर जाकर आधुनिक जीवन से परिचित हो जाते हैंl शहर के चकाचौंध से प्रभावित प्राणी वापस ग्रामीण जीवन से विमुख हो जाते हैंl कुछ ऐसे लोग होते हैं जो गाँव में शहर की सारी व्यवस्थाएँ लाकर गाँव को शहर जैसा बदल देते हैं l इस तरह गाँव में शहर जाकर बसने में देरी नहीं लगती है l
शहरीकरण से आकर्षित कुछ लोग अपने परिवार को शहर ले जाते हैं या तो वहीं बस जाते हैंl कुछ ऐसे मानस होते हैं जो गाँव में शहर की सारी व्यवस्थाएँ लाकर गाँव को शहर जैसा बदलते हैं l इस तरह गाँव में शहर जाकर बसने में देरी नहीं लगती हैl गाँव की सूरत दिन-ब-दिन शहर का मुखड़ा धारण करती जा रही हैl इसी पृथ्वी के वासी “वनवासी” पहाड़ी – जंगली प्रदेशों में रहते हैंl उनके पास रहने के लिए न ही पक्का मकान, न बिजली, न ही सड़क हैl बच्चे दिन-रात घूम फिरकर मस्ती करते हैंl नई पीढ़ी पैतृक पेशा अपना लेती हैं l उनकी दुनिया आकाश के नीचे पहाड़ – जंगल ही हैl इसलिए पढ़ाई – लिखाई से अति दूर हैं और पढ़ने -लिखने से प्राप्त लाभ से भी अज्ञात हैं l
सरकार द्वारा पिछड़े वर्ग के लिए निर्धारित योजनाओं से अनभिज्ञ लोगों को बैंगलोर की निहारिका नायर जानकारी दे रही है l निहारिका के बारे में एक अखबार में छपे लेख से दुनिया को पता चला कि ग्यारहवीं में पढ़ने वाली इस छात्रा ने कर्नाटक एवं केरल राज्य के वनवासियों को जीने की राह दिखाई l वह अपनी प्रसिद्धि केलिए नहीं अपितु मानव सेवा माधव सेवा समझकर इनके बीच पहुँचीl निहारिका ने वहाँ के लोगों को सरकार की कई कार्य व्यवस्थाओं के बारे में बताकर उनके आधार कार्ड का पंजीकरण करवाया l उनकी आवश्यकताओं की पूर्तिकरण केलिए वह निधि कोष से हरेक परिवार को ₹40,000 की आर्थिक सहायता प्रदान करने में लीन है l यहाँ के वासियों के स्वास्थ्य बनाए रखने हेतु स्वास्थ्य शिविर लगाया गयाl बच्चों को पौष्टिक आहार मिलने के उद्देश्य से सौर कुकर भी प्रदान किया l
निहारिका चाहती है कि पहाड़ी प्रदेश के बच्चों की पढ़ाई के लिए एक विद्यालय खोला जाएl यह बच्चे दिनभर खेलने – कूदने में अपना समय निकालते हैं l बच्चे नहीं जानते की पढ़ाई जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है इसलिए घर में बड़ों के कामों में हाथ बंटाकर अपना जीवन चला रहे हैं l निहारिका इन बच्चों के लिए शिक्षा की व्यवस्था की अपेक्षा हेतु कार्यरत हैl निहारिका आशा करती है कि वहाँ के सारे बच्चे पढ़ाई – लिखाई से अर्थपूर्ण जीवन की उपलब्धि को प्रमुखता दें l
इस तरह निहारिका मानवों के माधव बनकर अपनी स्कूली पढ़ाई के साथ-साथ पिछड़े वर्ग के लोगों के कल्याण हेतु अनवरत कार्य में जुटी हैl इस बालिका के अथक परिश्रम का सुखद परिणाम का लाभ पहाड़ी वासियों को मिलना आरंभ हो गया है और लोग निहारिका के इस कार्य से लाभान्वित होकर ऐश्वर्यपूर्ण जीवन की ओर उन्मुख है l निहारिका की छवि मानव जीवन के प्रति सहानुभूति ही नहीं सामाजिक कर्तव्य का भी सटीक भाव प्रदर्शन करता है l यदि हमारे समाज के लोग खोज – खबर कर पिछड़े वर्ग के सहायक हस्त बन जाए तो हमारे देश से बढ़कर दूसरा संपन्न राज्य खड़ा ही नहीं हो सकता l देश की उन्नति से पूर्व छात्रवर्गों को प्रेरणा स्रोत बनने की आवश्यकता हैl निहारिका जैसी छात्र – छात्राओं के मन में देश सेवा के बीज बोने से देश उन्नति की ओर बढ़ेगी और हमारा देश जगत का चमकता सितारा बन जाएगा l
Written by Jayaajitan.
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