भारत के दक्षिण प्रांत ‘मैसूर’ में मनाया जाने वाला दशहरा महोत्सव का आज समापन दिवस है । दशहरे की परंपरा का आरंभ विजयनगर के शासकों ने की थी और मैसूर के वाडियारों ने इसे आगे बढ़ाया। उन्होंने इसे केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित न रखकर, कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के एक परम्परा में बदल दिया। यह त्योहार बीती चार सदियों में बदलते समय के अनुसार निखरता गया जो लोगों को एक सूत्र में पिरोने का रूप ले चुका है। मैसूर का विकास युद्धों या संघर्षों से नहीं बल्कि अपनी परंपराओं के माध्यम से हुआ है और इसकी विरासत केवल महलों तक ही सीमित नहीं रही । तत्कालीन महाराजा, राजा नलवाड़ी कृष्णराज वाडियार ने ‘ब्रांड मैसूर’ की अवधारणा की नींव रखीं । उन्होंने मैसूर सिल्क, मैसूर सैंडल सोप, मैसूर पेंटिंग्स, मैसूर पाक और केआरएस बांध जैसी उपलब्धियों को सामने रखा, जिन्होंने इस शहर का नाम राज्य की सीमाओं से बाहर निकालकर पूरी दुनिया तक पहुँचाया। इस क्षेत्र के विकास और दशहरे की परंपरा में मैसूर के शाही परिवार का योगदान वाडियार राजवंश के इतिहास से अलग नहीं किया जा सकता।
ग्यारह दिनों तक चलने वाला मैसूर दशहरा उत्सव आज विजयादशमी के दिन मैसूर पैलेस परिसर में एक भव्य समापन के साथ संपन्न होगा। उत्सव की शुरुआत ‘नंदी ध्वज पूजा’ से होगी जिसे मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार दोपहर 1:36 बजे से 1:56 बजे के बीच ‘मकर लग्न’ में संपन्न करेंगे। इसके बाद शाम 4:10 बजे से 4:35 बजे के बीच ‘मीन लग्न’ में गणमान्य व्यक्ति देवी चामुंडेश्वरी को जो स्वर्ण हौदे में विराजमान होंगी उस पर पुष्प अर्पित करेंगे। उत्सव का समापन शाम 7:00 बजे बन्नीमंटप ग्राउंड्स में होने वाली मशाल परेड और ड्रोन शो के साथ होगा।
कर्नाटक और देश के अन्य हिस्सों से आने वाले लाखों लोगों की भीड़ को संभालने के लिए सुरक्षा और यातायात की व्यापक व्यवस्था की गई हैं। कर्नाटक सरकार के विशेष आमंत्रित अतिथियों में केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन और तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के साथ-साथ उद्योग जगत के दिग्गज, विदेशी गणमान्य व्यक्ति और कन्नड़ फिल्मों के लोकप्रिय सितारे शामिल हैं।
चौवन साल के हाथी ‘प्रशांत’ को इस साल मैसूर दशहरा जंबू सवारी के लिए मुख्य हाथी के रूप में चुना गया है। ‘प्रशांत’ पहली बार 750 किलो वजनी सोने का हौदा (अंबारी) उठाएगा जिसमें देवी चामुंडेश्वरी की प्रतिमा रखी जाएगी। वह अनुभवी हाथी ‘अभिमन्यु’ की जगह लेगा जो लगातार छह वर्षों तक सोने का हौदा उठाने के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार साठ साल की उम्र में दशहरा की मुख्य जिम्मेदारियों से निवृत्त हो रहा है । फिर भी अभिमन्यु को पूरे जुलूस का नेतृत्व करने की नई भूमिका दी गई है । ‘धनंजय’ को अंबारी हाथी के तौर पर चुना गया है । वैसे अंबारी हाथी पारंपरिक जंबू सवारी जुलूस का मुख्य आकर्षण होता है जबकि ‘गोपी’ ‘नौपट्ट हाथी’ होगा जो दूसरे नंबर पर अभिमन्यु के ठीक पीछे चलेगी।
वन विभाग ने इस महत्त्वपूर्ण कार्य के लिए इन चार हाथी प्रशांत, धनंजय, सुग्रीव और एकलव्य को चुना था । इन में प्रशांत को वन विभाग ने उसकी शारीरिक क्षमता, वजन उठाने में सक्षम, शारीरिक बनावट, चलने में स्थिरता, सहनशक्ति और शांत स्वभाव जैसे गुणों को देखकर चुना गया है । इसके अतिरिक्त ‘प्रशांत’ मैसूर दशहरा उत्सव में अट्ठारह वर्षों से जुड़ा है। इस तरह प्रशांत को महल के आसपास के माहौल और जुलूस के रास्ते की अच्छी जानकारी तथा भारी भीड़, पारंपरिक संगीत और महावतों के निर्देशों के बीच भी शांत बने रहने की क्षमता भी है ।
विजय यात्रा में शाही वाडियार परिवार, माननीय राज्यपाल श्रीमती सुधा यादव, मुख्यमंत्री शिवकुमार और अन्य मंत्री शामिल होंगे। विधायक तनवीर सैत इस कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। यह जुलूस महल के बलराम गेट से निकलेगा, सयाजी राव रोड से होते हुए के.आर. सर्कल और देवराज मार्केट के पास से गुजरेगा और बन्नीमंटप की ओर बढ़ेगा। महल की घुड़सवार सेना, माउंटेड पुलिस बैंड और सांस्कृतिक कलाकार इस आयोजन की शोभा बढ़ाएँगे। उत्सव का समापन बन्नीमंटप में एक मशाल परेड के साथ होगा, जिसमें घुड़सवार दस्तों का प्रदर्शन, संगीत बैंड और साहसिक करतब देखने को मिलेंगे।
कर्नाटक भर के कई लोक कला दल, साथ ही विभिन्न जिलों और सरकारी विभागों की झाँकियाँ, पारंपरिक संस्कृति और सरकार की उपलब्धियों को प्रदर्शित करेंगी। इस साल केवल पंद्रह जिलों को झाँकियाँ शामिल करने की अनुमति दी गई है। सेना, नौसेना और वायु सेना की झाँकियाँ एक अतिरिक्त आकर्षण होंगी।
इस साल के सांस्कृतिक कार्यक्रमों के दौरान वर्षा ने प्रस्तुति को बाधित की जिससे मैसूर के प्रशंसक निराश हो गए। बारिश की वजह से सिद श्रीराम का ‘युवा दशहरा’ कॉन्सर्ट और भारतीय वायु सेना का एयर शो रद्द करना पड़ा। हालाँकि इस साल के दशहरा समारोह में ‘कंबाला’ कार्यक्रम बेहद सफल रहा जिसमें भैंसों की एक सौ पचास जोड़ियों ने हिस्सा लिया।
इस साल के जश्न के मुख्य आकर्षण के रूप में, बन्नीमंटप के ऊपर अंधियारे आसमान में हज़ारों रोशनियाँ जगमगा उठीं। पलक झपकते ही मैसूर की रात का आसमान अद्भुत नज़ारों से भर गया। मशाल जुलूस वाले मैदान के ऊपर पंख फैलाए एक मोर, एक शेर, विशाल नंदी, सुनहरी चमकती हौदा और स्वयं देवी चामुंडेश्वरी की आकृतियाँ उभर आईं। रंग-बिरंगी एलईडी लाइटों से लैस तीन हज़ार पाँच सौ ड्रोन की मदद से इस शो में बारह अलग-अलग आकृतियाँ पेश की गईं, जो दशहरा उत्सव के सबसे बड़े आकर्षणों में से एक बन गया । इस रात का मुख्य आकर्षण मोर वाला डिज़ाइन था जिसे चामुंडेश्वरी इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कॉरपोरेशन ने गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के प्रयास के तौर पर पेश किया था। इसके अलावा महल और दस अन्य जगहों पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में 500 से ज़्यादा समूहों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया।
इस साल के त्योहार के लिए मैसूर शहर को बहुत ही सुंदर ढंग से सजाया गया है और यह अगले दस दिनों तक इसी तरह जगमगाता रहेगा। इसके अलावा इस साल एक नई प्रतियोगिता भी शुरू की गई है कि जिसमें कोई भी त्योहार के पहले दिन से लेकर आखिरी दिन तक की रील्स बनाकर साझा करेगा वह इनाम जीत सकता है। कर्नाटक सरकार सबसे बेहतरीन सौ प्रविष्टियों को सम्मानित करेगी।
संपूर्ण कर्नाटक इस उत्सव में उत्साह पूर्वक भाग लेने के लिए पहुँच रहा है पर वे सब इस आशंका में कि कहीं पानी बरसकर दशहरा महोत्सव को किरकिरा न कर दें क्योंकि भारतीय मौसम विभाग ने आंधी-तूफान, तेज हवाओं और भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया है। अतः कर्नाटक के लोग देवी चामुंडेश्वरी के समक्ष इसी प्रार्थना में है कि उत्सव में वर्षा एक बाधा न बनने की कृपा करें।

Penned by Jayaajitan.
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