व्यस्त नगर के मध्य एक आलीशान बंगले के सामने फाटक के दोनों कोनों पर देवालय के द्वारपाल की तरह एक-एक मूर्ति स्थापित है I फाटक पर लटका एक काली तख्ती, उस पर स्वर्णाक्षरों में लिखा हुआ है -” जय काली माँ, नीलमणि निवास, श्रीमान “नीलकंठ”, श्रीमती ” सुभद्रा” l इस रास्ते से आने – जाने वाले लोग इसे बड़े अचंभे से पढ़ते और निहारते हैं l नवयुवक व बच्चे सेल्फी लेने का प्रयास करते हैं, लेकिन कोई भी कामयाब नहीं हो पाते क्योंकि चौकीदार उन्हें वहाँ से भगा देता है l
नीलमणि नीलकंठ का घर का नाम है। लोगों का कहना है कि नीलकंठ पहले बहुत ही गरीब था I अपना परिवार चलाने के लिए घर के सामने कुछ सब्जियाँ उगाकर मंडियों में बेचता था l सुभद्रा घर का सारा काम अकेले ही संभालती थी l उनके दो बेटे थे l दोनों होशियार बच्चे थे, पर घर की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण दोनों बेटों को सरकारी स्कूल में भेजना पड़ा l सुभद्रा माँ काली की बड़ी भक्तिन थी l वह हर दिन सुबह-सुबह उठकर नहा- धोकर गीले वस्त्रों में, बालों को सुखाए बिना सूरज उगने से पहले काली माँ के मंदिर पहुँच जाती थी l सुभद्रा के बाल से टपकता पानी रास्ते भर उसका पदचिह्न बन जाता, भक्ति में विलीन सुभद्रा के मुख से केवल जय माँ काली का मंत्रोच्चारण सुनाई देता था I
देखते – ही – देखते नीलकंठ अमीर बन गया, लोगों का मानना है कि एक नीलमणि ने नीलकंठ के भाग्य का पिटारा खोला l नीलमणि की माया ने उसकी झोपड़ी की जगह एक बड़ा बंगला खड़ा किया परंतु अमीरी ने उनके जीवनचर्या को अधिक नहीं बदला l नीलकंठ अब भी सब्जियाँ उगाकर मंडियों में बेचता था और सुभद्रा पहले की तरह हर दिन सुबह उठकर गीली लाल साड़ी में, लंबे – लंबे धुले बालों से टपकता पानी, नंगे पाँव, हाथ में फूलों की टोकरी, टोकरी में कई तरह के लाल – लाल फूल, अगरबत्ती, कर्पूर आदि पूजा की सामग्री लिए काली माँ के मंदिर जाती थी l एकमात्र बदलाव यह था कि मंदिर से वापस लौटते समय सुभद्रा लड्डू दान में देती थी I
कॉलेज की पढ़ाई पूरी हो जाने पर नीलकंठ के बड़े बेटे को बड़ी कंपनी में नौकरी मिल गई और थोड़े दिन में ही उसकी शादी सरिता नाम की लड़की से हो जाती है l उनके छोटे बेटे को विदेश में नौकरी मिलने के कारण वह वहीं बस गया I तीन महीने के बाद छोटे बेटे ने फोन किया और कहा, “ माँ – पिताजी आप लोगों को मैं एक वीडियो भेज रहा हूँ, कृपया देख लीजिए l” इतना कहकर उसने फोन रखा I उस वीडियो को चलाया गया,वीडियो में वह एक अमरीकी लड़की से विवाह करता हुआ दृश्य के बाद अपने माता-पिता को संबोधित करते हुए बोला,” पिताजी और माँ, यह है सिनड्रेला, मैंने इससे शादी कर ली है l मैं हिंदू होने के कारण इसके घर में मनाही थी l इसलिए मैंने ईसाई धर्म अपना लिया है l वीडियो पूर्ण होने से पहले ही सुभद्रा बेहोश हो गई, उसे तुरंत नगर के बड़े अस्पताल में भर्ती कराया गया l
अस्पताल के डॉक्टर ने कहा,” हमें इनकी पूर्ण जाँच करनी है, इन्हें तीन-चार दिन अस्पताल में ही रहना होगा l” नीलकंठ ने कहा,”ठीक है डॉक्टर साहब, आप जैसा कहेंगे हम मानने को तैयार हैं l “ तीन दिन बाद डॉक्टर ने नीलकंठ को बुलाकर कहा, “आपको मैं जो बात बता रहा हूँ, उसे हिम्मत रखकर सुनिए l आजकल हर रोग की दवा है, बस कहे अनुसार दवा लेनी है, दवा लेने से जल्द बीमारी से ठीक हो जाएगी l ” नीलकंठ का हृदय धक-धक करने लगा, उसने अपने दिल को थाम लिया और सुनने को तैयार हुआ l डॉक्टर ने कहा, “ तुम्हारी पत्नी सुभद्रा को स्तन कैंसर हुआ है, वह सेकंड स्टेज पर पहुँच गई है, उसे दवाइयाँ लेनी ही होगी, साथ ही सर्जरी से कैंसर वाले स्तन को निकालना होगा ।” नीलकंठ ने रुआँसा स्वर में कहा, “डॉक्टर आप पैसों की चिंता न करें, मेरी सुभद्रा को बचाने के लिए जितना भी पैसा लेना है ले लीजिए, लेकिन उसे बचाएँ l” कीमोथेरेपी करने सुभद्रा के सिर के बाल निकाल दिए गए, सर्जरी की तैयारी करने से पहले पाँच लाख का बिल अस्पताल में जमा कर दिया गया l इस दौरान सुभद्रा से मिलने के लिए उनकी बड़ी बहू सरिता के पिता धर्मयुग अस्पताल में आए। मौका मिलने पर अपनी बेटी सरिता से पूछा,” बेटी सरिता, तुम्हारी शादी को हुए छह महीने हो गए, तुम्हें उस नीलमणि के बारे में कुछ पता चला ?” सरिता ने कहा,” नहीं पिताजी l” इतना सुनते ही बिना कुछ कहे धर्मयुग बाहर जाते हैं और सरिता को फोन लगाकर समझाते हुए कहते हैं,” देख मेरी बिटिया रानी, तुझे उस घर की रानी बनना है, रानी बनने के रास्ते खुल रहे हैं, अब तेरे देवर और उसकी पत्नी कभी भारत नहीं आएँगे और तेरी सासू माँ को कैंसर हो गया है, वो और कितने दिन जीवित रहेंगी, ज़्यादा – से – ज़्यादा दो – तीन महीने, सासू माँ के मरने से पहले ही नीलमणि को अपने हाथ ले ले,घर में अब कोई नहीं है, तो तुम आराम से नीलमणि ढूँढ सकती हो, तुझे इस मौके का फायदा उठाना चाहिए l” सरिता ने घर के हर कोने में नीलमणि ढूँढ़ा पर उसे सिर्फ अलग-अलग बैंक के चार एटीएम कार्ड मिले l उसने तुरंत अपने पिताजी को फोन लगाकर बताया, “ पापा, नीलमणि कहीं नहीं दिखा पर एटीएम के चार कार्ड मिल गए l” उसके पिताजी ने समझाते हुए कहा, “ बेटी, कभी भी उस एटीएम का उपयोग नहीं करना मुश्किल में पड़ जाओगी l”
सुभद्रा सर्जरी से पहले काली माँ के दर्शन करना चाहती थी, पत्नी के आग्रह को पूरा करने के लिए नीलकंठ ने केरल के प्रसिद्ध काली मंदिर के दर्शन करने अपनी ही गाड़ी में बिठाकर ले गए I मंदिर में भक्तों की खचाखच भीड़ के बीच सुभद्रा चक्कर खाकर नीचे गिर गई थी तो उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, वहाँ के डॉक्टर ने जाँच कर कहा, “इन्हें एनीमिया है शायद कोई तेज दवाई का सेवन कर रही हैं l” नीलकंठ ने सुभद्रा को कैंसर की बीमारी और उससे जुड़ी सर्जरी के बारे में बताया l डॉक्टर ने हर तरह की जाँच करने के बाद कहा, सुभद्रा को कोई बीमारी नहीं है, न तो स्तन कैंसर न ही कोई दूसरी बीमारी l” नीलकंठ पूर्ण रूप से थम गए और लड़खड़ाती आवाज़ में कहा, “पर उसका एक स्तन निकाला जाएगा l” डॉक्टर ने कहा, “तुम दूसरे अस्पताल ले जाओ और जाँच करवाओ शायद तभी मेरी बात का यकीन करोगे l” नीलकंठ अपनी पत्नी को तीन अन्य अस्पताल ले गए, तीनों अस्पताल के डॉक्टरों ने एक जैसी बात बताई कि सुभद्रा को कोई बीमारी नहीं है, शरीर की कमज़ोरी के कारण उसे चक्कर आया था, वो पूरी तरह ठीक हैं l”
नीलकंठ यह बात सुनकर बेहद खुश हुए और सुभद्रा को लेकर घर वापस लौट आये l नीलकंठ घर आकर खूब रोए और कहा, “हे भगवान,हमने कोई पाप नहीं किया फिर सुभद्रा को क्यों इस तरह का दंड दिया ?” सरिता ने सुना और मौके का फायदा उठाने हेतु कहा,” पिताजी, शायद वह नीलमणि का शाप होगा, उसे घर में रखने से पाप चढ़ गया होगा l” नीलकंठ ने कहा,” नीलमणि तो उदार आदमी था, न तो हमने उनका नुकसान किया न तो नीलमणि ने, बल्कि उन्होंने हमारा उद्धार किया l” सरिता पहले कुछ समझ नहीं पाई, उसने धैर्य भरकर पूछा, “ पिताजी, नीलमणि वही कीमती पत्थर है ना और उसे आप आदमी कह रहे हैं l” नीलकंठ ने कहा,” हाँ सरिता, बड़े व्यापारी थे नीलमणि, उन्होंने नोटबंदी के समय चार बोरी भर पैसे लाकर हमें थमा दिए और कहा, ” इसे बैंक में जमा कर दो, चार बैंक के खाते मेरी सेक्रेटरी आकर खुलवा देंगी, मेरी जान मुश्किल में है, मैं कभी भी मर सकता हूँ, मरने से पहले मुझे यह परोपकार करना है l” देखते-देखते उनकी सारी पूँजी हमारे नाम पर चार बैंकों में जमा हो गई , इस बंगले के लिए ईंट, सीमेंट सब आता रहा, हमने एक पैसा भी नहीं लगाया और आखिर आलीशान बंगला उठ खड़ा हुआ l सब ने समझा हमें कीमती पत्थर नीलमणि मिला, उसी की माया से हमारे पास सब कुछ है, वास्तव में असली नीलमणि को कोई नहीं जानता l”
यह सुनकर सरिता कुछ क्षण के लिए हिली डुली नहीं, बस अपने पिताजी को फोन लगाकर कहा, “ पिताजी, यदि आप अपनी बेटी को खुश देखना चाहते हो तो आइंदा नीलमणि के बारे में मुझसे मत पूछना l” धर्मयुग ने कहा, “ ओ, लगता है नीलमणि मिल गई, इसलिए तुझे इतना घमंड हो रहा है l” सरिता ने कहा, “ हाँ, मुझे वह नीलमणि मिल गई, नीलमणि की माया के बलबूते पर मैं बोल रही हूँ, यदि आपका दिल साफ़ है तो हमारे घर आना, नहीं तो कभी भी मत आना l”
सालोंसाल बाद भी नीलकंठ और सुभद्रा से लोग नीलमणि के बारे में पूछते थे और नीलकंठ का जवाब था, “नीलमणि, आकाश के नक्षत्र बन गए, यह सब उनके दान की माया है, नीलमणि और भी गरीबों को मिलता रहे, यही हमारी प्रार्थना है l” लोगों ने बिना समझे सिर हिलाया और चल दिए , धीरे – धीरे लोगों ने पूछना बंद कर दिया l यथापूर्व सुभद्रा हर दिन मंदिर जाने लगी l नीलकंठ भी अपनी पत्नी सुभद्रा का साथ देने हेतु मंदिर में नंगे पाँव जाने लगे l सुभद्रा के सिर के बालों से टपकता पानी नदारद था किंतु आँखों से बिना रुके टपकते खुशी के आँसू को पोछती, मुख पर मुस्कान भरकर – जय माँ काली का मंत्रोच्चारण करती , उस रास्ते से आने-जाने वाले जय माँ काली कहने लगे जिनका कारवाँ बन गया l संपूर्ण परिदृश्य भक्तिमय – सा लगने लगा था I
Penned by Jayaajitan.
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