कविता: “मैं हूँ सब्जी रानी”

कतार में सजी हरी तरकारियाँ,

कर रही हैं इंतजार अपनी बारी,

जैसे बाज़ार में हो रहा हो कैटवॉक,

और वे चुनी जाएँगी मिस वर्ल्ड।

खूबसूरती की प्रतिमूर्ति माना,

और चुनचुन कर ली सब्ज़ियाँ,

पर सब्ज़ीवाली के ताने सुनकर ,

बेहज़मी हुई मेरे पेट को  ।

तानों को अनसुना कर दिया,

और चाव से बनाई सब्जी,

पर हाय ! बनी सब्जी फीकी-फीकी,

सब बोल उठे “बेस्वाद सब्जी”।

हाय ! बाहर के खाने पर लगे अंकुश,

चाहत घर का खाना करें सबको खुश,

मैं भी कैटवॉक करूँ मिस वर्ल्ड बन ,

और कहलाऊँ घर की  “सब्जी रानी” ॥

Penned by Jayaajitan.

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