लेख : चाय के साथ “समोसा”

भारतीय घरों की रसोई की रानी जैसे कि माँ, बहन या दादी- नानी हमेशा इस बात पर सोच-विचार करती रहती हैं कि शाम की चाय के साथ क्या परोसा जाए। अधिकत्तर लोग चाय  के साथ  कुछ चटपटा – कुरकुरा – नमकीन –  तेलीय पकवान खाने की सूची बेसब्री से बनाते हैं। शाम के नाश्ते को दिन का बहुमूल्य खान-पान मानने वाली माएँ यह काम बड़े गर्व से करती हैं। कई माँएँ अगली शाम के नाश्ते की तैयारी एक दिन पहले ही शुरू कर देती हैं।अक्सर, स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थीयों की माँ ही नहीं, बल्कि नौकरी से लौटी हर औरत घर पहुँचते ही नाश्ते की तैयारी शुरू कर देती हैं, उन्हें शाम के स्नैक्स की चिंता रहती है। कभी-कभार थके- हारे मन की इच्छा को पूरा करते हैं बने  – बनाए पकवान जो हमें – हलवाई की दुकान में मिल  जाते हैं।

इसी इच्छा से कुछ दिन पहले मेरे पति ने चार समोसे खरीदे। जब मैंने उनसे उत्सुकता से कीमत पूछी, तो उन्होंने राजा की तरह गंभीरता दिखाते हुए कहा, “चालीस रुपये में चार समोसे।” यह सुनकर मेरा सिर चकराने लगा। असल में, समोसे में कोई स्वाद नहीं था। मैं सिर्फ आलू पसंद होने की वजह से समोसे खाती रही। समोसे खाते हुए मैंने अपने पति से कहा कि मेरे पापा की फैक्ट्री में पाँच पैसे में छह समोसे मिलते हैं, जिसमें मटर भी मिला होता है। मेरा एक समोसे से पेट नहीं भरता था, इसलिए मैं कम से कम तीन या चार समोसे खा लेती थी। खैर, उस समय के समोसे मेरे मुँह में ऐसे छा गए थे कि उनका स्वाद भुलाया नहीं जा सकता था।

इसीलिए मुझे ये समोसे इतने फीके लगे। मेरे पति ने तुरंत जवाब दिया, “हैदराबादी समोसे कमाल के होते हैं। हम वहाँ तब तक समोसे खाते रहते हैं जब तक हमारा पेट नहीं भर जाता। उनमें गाजर भी डाली जाती है।” मैंने उन्हें संदेह भरी नज़रों से देखा और पूछा, “तो फिर समोसे का स्वाद अच्छा नहीं होगा क्योंकि गाजर डालने से भरावन का स्वाद बदल जाएगा। ” इस बात पर हमारी गरमागरम बहस हुई। उनका जवाब था कि किसी रेसिपी में यह या वह इस्तेमाल करने की कोई मजबूरी नहीं है। इंसान हमेशा से नई रेसिपी से भरी डिश बनाने के लिए अपना दिमाग लगाते रहे हैं। यहीं पर नई चीज़ों को मिलाकर समोसे का आविष्कार हुआ। तब से, एक ही पकवान को अलग-अलग तरीकों से बनाने की कला बहस का विषय बन गई है।”

आजकल नई-नई सोच ने नवीन दुनिया में समोसे को खड़ा किया है। बावर्ची ने समोसे का कई रूप में आविष्कार किया है। इसी दौरान शाकाहारी से लेकर माँसाहारी  वाले समोसे ने जन्म लिया है। मुझे समोसे का असली स्वाद चखने का मौका देने की चाहत में, मेरे पति ने हर दिन अलग-अलग भरावन वाले समोसे खरीदना शुरू कर दिया। मैं हर दिन वो समोसे खाती थी लेकिन अनजाने में मेरे मुँह से तुरंत यही शब्द निकलते थे कि पापा की फैक्ट्री के पाँच पैसे वाले समोसे कमाल के थे। उन समोसे को कोई हरा नहीं सकता था।

मेरे पति यह सुनकर चौंक जाते, और मैं कहती, “क्यों न लोगों को समोसे के नाम पर नए-नए आविष्कार करने का चलन खत्म किया जाए?” मेरे पति को लगता था कि मेरी सोच तरक्की में रुकावट डालेगी क्योंकि मैं इस बात पर अड़ी थी कि नए आविष्कारों से समोसे अपना असली स्वाद खो देंगे। मेरे हिसाब से, खाने में मिलावट नहीं होनी चाहिए, व्यंजनों में पारंपरिक स्वाद होना चाहिए। व्यंजन के आविष्कार की वजह से कई खाने की चीज़ों में असलीपन नहीं रह जाता। असल में, हम जो भी खाते हैं, उनमें पुरानी यादें छिपी होती हैं। मेरा भी मन करता है कि उन दिनों का स्वाद वापस लाया जाए । मैं यह जानती हूँ कि ये  नामुमकिन है, क्योंकि उन दिनों मिर्च और धनिया समेत हर मसाला घर पर ही पीसा जाता था। ऐसे मसालों में असलीपन दिखता था। जबकि आजकल, हर चीज़ में मिलावट होती है। इन मिलावटों को रोकने के लिए सरकार को दखल देना चाहिए, जो कभी मुमकिन नहीं है। सच तो यह है कि मंत्री सभा में खाद्य सामग्री को चाव से खाने वाले कभी पुराने – नए स्वाद की उलझन में नहीं पड़ते हैं।

इसके लिए मेरा ध्यान ऑथनसिटी की ओर बढ़ा जब पता चला कि विदेशों में चार समोसे बीस पाउंड में मिलते हैं, यह सुनकर मन विचलित हुआ l लेकिन यह भी समझ आया कि विदेशियों के लिए समोसे एक विस्मय भरा पकवान है l भरावन बिना किसी मशीन की सहायता से तले हुए समोसे केवल आनंद-ही आनंद दिलाता है। उनके लिए समोसे का आकार भी करिश्मा-सा है।इसे सुनकर मेरा मन ऑथन्टिक व्यंजन की ओर चल दिया। ऐसा सा लगा कि क्यों न अपने हाथों से मसाले में भी बिना किसी मिलावट से समोसे को बनाया जाए। कभी यही सादगी की नींव थी। जब मैं असली स्वाद का मज़ा लूँ, तो पढ़ने वाले भी इसे अपने हाथों से बनाने का समय निकाल सकें। शाम के नाश्ते के लिए इमली की चटनी या मिर्च की चटनी के साथ समोसे का आनंद लिया जा सकता है l इसी उद्देश्य से लेख में समोसे के प्रति मेरी भावनात्मक और स्वादिष्ट यात्रा होने के कारण समोसे की रेसिपी शामिल की है।

आगे से मैं पाक कला से संबंधित नए – नए  पकवान बनाने के तरीके साझा करूँगी l

# यह पहला पकवान :-

  • समोसे के लिए आवश्यक सामग्री:-

1. मैदा चौथाई कप, कॉर्नफ्लोर 50 ग्राम, बॉम्बे सूजी 10 ग्राम, नमक स्वादानुसार, दो चम्मच तेल, पानी ज़रूरत के हिसाब से।

2. जीरा पाउडर आधा चम्मच, मिर्च पाउडर आधा चम्मच, गरम मसाला पाउडर / अमचूर मसाला पाउडर आधा चम्मच, दो हरी मिर्च कटी हुई, कुछ धनिया पत्ती, नमक स्वादानुसार।

3. अदरक लहसुन का पेस्ट एक बड़ा चम्मच।

4. हरी मटर पकी हुई 100 ग्राम, आलू पके हुए 250 ग्राम।

5. चिकन हड्डियाँ रहित गरम मसाले में पका हुआ 100 ग्राम।

मटन गरम मसाले में पका हुआ 100 ग्राम।

6. आधा लीटर सुगंधित कुकिंग ऑयल।

समोसे बनाने की प्रक्रिया :-

1. सबसे प्रथम उपरोक्त सामग्रियों में पहली सारी सामग्री के मिश्रण को आधे घंटे के लिए अलग रख दें। (जैसे पूरी के लिए आटा गूंथते हैं)।

2.जब पैन गरम हो जाए, तो उसमें दूसरी सामग्री को थोड़े से तेल में डालें। जब यह गरम हो जाए, तो तीसरी और चौथी सामग्री डालें, मिलाएँ और जब यह हल्का सुनहरा हो जाए तो अलग रख दें।

3.आटे को पूरी के लिए मनचाहे आकार में गोल बेल लें। हर टुकड़े को दो हिस्सों में बाँट लें। अब,  उन भूने  मसाले के मिश्रण को बीच में डालकर किनारों को कोन जैसा बनाएँ।

4.एक गहरे पैन में कुकिंग ऑयल डालें और जब वह गर्म हो जाए, तो उसमें चार से पाँच करी पत्ते डालकर भून लें । इसके बाद, तैयार पूरी बॉल्स को अच्छी तरह से  तल लें ।

5. माँसाहारी लोग मसाले में पाँचवीं सामग्री डालकर उसी तरह तल लें।

Penned by Jayaajitan.

Please comment your views to: jayaajitan@gmail.com

Leave a Reply