कविता : फूलवाली

नन्हा शिशु अंक में,

हाथ में पुष्पों की टोकरी,

टोकरी में पुष्प की माला

प्रभु के अर्पण को,

खरीदे जो अपनी मन्नत में ।

देवालय में भगवान

निहार रहे हैं भक्तों को,

निज कामना की पूर्ति हेतु

खरीदें जो नित,

उन कुसुम मालाओं को ,

जले ताकि चूल्हा उस अकिंचन का ll

Penned by Jayaajitan.

Please comment your views to: jayaajitan@gmail.com

Leave a Reply