जहाँ संग-संग ही हो रहना
तुम उन रिश्तों को सदा निभाना
निरर्थक हो वाद- विवाद की बाजी
न करना तुम, कहती थी हमारी माँ ॥
समय की करवट बदल भी जाए
रिश्तों के बंधन को कोई तोड़ न पाए
हर हाल में प्यार जताने की हो तेरी बाजी
बातों को दिल से न लेना, कहती थी हमारी माँ॥
सर्वत्र भाईचारे को तुम तवज्जो देना
जगत में एकता से बहुमत को बढ़ाना
जहाँ – जहाँ हारी तुमने जो भी हो बाजी
लड़खड़ाना मत, कहती थी हमारी माँ ॥
Penned by Jayaajitan.
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