नौकरी करते लोगों की बस यात्रा बड़ी रोचक तथा ऐक्य का सुंदर बंधन दिखता है l वे सब अलग-अलग संस्थानों में काम करते हैं किंतु बस में इन सब यात्रियों की एकता दर्शनीय है l सबसे आश्चर्यचकित करती हैं उनकी समता जो केवल यात्रियों के मध्य ही नहीं बस चालक भी इनसे विशेष दोस्ताना रखते हैं l उन सबकी तीसरे आदमी यानी अन्य व्यक्ति के हस्ताक्षेप पर एकत्रित होकर उसे किनारा करने की चेष्टा भी देखने को मिलती है।वे सब तीसरे आदमी मिलता है l कुछ यात्रियों की यात्रा तो बस चालक के साथ शुरू होकर बस चालक के साथ ही समाप्त होती है l तब यहाँ यात्री के आखिरी पड़ाव होते हैं, वहीं से अगली सुबह आपस में मिलने की आकांक्षा से अपने-अपने मार्ग की ओर चल पड़ते हैं l बस चालक और यात्रियों के बीच ऐसे बने – बनाए सुंदर बंधन में बंधे कई उदाहरण मिलते हैं l उनका मिलना- जुलना एक ऐसी बेला है जहाँ वे अपने से संबंधित बातों को या घटनाओं को आपस में बाँटते हैं l अपनी उलझनों को साझा भी करके उसका समाधान ढूँढ़ निकालते हैं l
बस में यात्रियों की संख्या दूसरे परिवाहन के तादात्म्य कम ही रहती है क्योंकि एक बस में बैठने की सीट के मुताबिक यात्री की संख्या होती है l रेल में हज़ार लोग यात्रा करते हैं किंतु उन सारे लोगों से हमारे दोस्ती नहीं हो पाती l जो यात्री हमारी सीट के आजू-बाजू बैठते हैं उनसे शनैः-शनैः बातें करते हुए अपनी निजी मामलों से लेकर राजनीति तक की बातें करना एक आम दृश्य है l इस तरह के वार्तालाप के दौरान यदि कोई विशेष सहायक व्यक्ति बनने योग्य लगे तो संपर्क पाने हेतु अपने- अपने फोन नंबर का आदान-प्रदान करते हैंl बस यात्रा के दौरान जहाँ भी बस रुकती है और यदि सारी यात्रियों को उतरना पड़े तो वहाँ उन सबका आपस में वार्तालाप करते हुए रमणीय दृश्य देखने को मिलता है l यहाँ मानवता को प्रधानता दी जाती है और सब छोटे – बड़े की भावना से परे होते हैं l कभी-कभी अपना प्यार जताने के लिए खाने – पीने की सामग्री आपस में बाँटते हैं I बस की यात्रियों को सड़कों पर से गुज़रने वाले लोगों को और भी करीब से देखने का मौका मिलता है l कभी- कभार दुख भरे मन से भी घर लौटना पड़ता है क्योंकि सड़कों पर घटित होती घटनाओं से वाकिफ होते हैं l वाहनों के बीच की होड़ भी हृदय को दहलाता है l हर वाहन के चालक अपनी गाड़ी को तेज़ी से चलाता है और इनके द्वारा आगे बढ़ने की ललक डरावना – सा लगता है l ऐसे में आपसी भिड़ंत से दुर्घटनाएँ होती हैं l फिर भी मनुष्य कभी – भी अपने इस व्यवहार को छोड़ने के लिए तैयार नहीं रहता l इसीलिए आँखों के सामने वेदना भरे हादसों को देखने के लिए मजबूर होना पड़ता है। यदि हमारी यात्रा बड़े ही सुकून रहीं तो हम बड़े भाग्यशाली हैंl
ऐसे भाग्यशाली अपनी बस यात्रा करते समय प्रकृति का आनंद लेते हैं l खिड़की से बाहर की ओर देखने पर चारों तरफ लगे हरे – भरे खेत या ऊँचे- ऊँचे पेड़ आँखों को लुभाते हैं l इस दृश्य को आँखों में उतारने के साथ ही कैमरे में कैद करने की आपसी स्पर्धा भी रहती है I पहाड़ों के बीच से बहती नदियाँ और नीले आकाश में छाए बादल अपनी कथा सुनाते हुए प्रतीत होते हैं।कुछ बस यात्री जो प्रकृति की आभा में स्वयं पक्षी बन कर आनंद उठाते हैं l ऐसे कई यात्री पर्वत की शिखाओं में पंछी की तरह उड़ान भरते हैं l उनकी इस कथा से जुड़ने हेतु फिल्मी गीतों को गुन- गुनाने वाले गायक भी देखने को मिलते हैं l यदि बस चालक संगीत प्रेमी हो और स्पीकर के माध्यम से पुराने फिल्मी गीतों को चलाया जा रहा हो तो मन कई गुना प्रफुल्लित हो जाता है l बस में चलती फिल्मी गीत और बस की खिड़की के बाहर का दृश्य में सामंजस्य हो तो वह पल गजब भरे होते हैं l
बस से लंबी यात्रा करने पर शरीर में थकान अधिक रहती है l कइयों को पैरों को लंबे समय तक लटकाए रखने से पैरों में सूजन हो जाता है l इसके अलावा कुछ लोगों को जी मचलने की समस्या के कारण बस यात्रा करने से कतराते हैं l खराब सड़क भी बस यात्रा के लिए बड़ी चुनौती है l सड़कों के बड़े-बड़े गड्ढे पर यात्रा करना जान की बाजी लगाने जैसा है l हर गड्ढे पर छलाँग लगाती गाड़ियों में बैठे यात्रियों की जान सूख जाती है l सड़कों पर गाड़ियों की भीड़ होने पर यातायात के अवरोध से समय बर्बाद हो जाता है l इस तरह यदि खराब परिवहन का इस्तेमाल करने से जान को भी खतरा पैदा होता है l किसी कारणवश गाड़ी को अधिक चलाने पर गाड़ी की मोटर गर्म होकर आग लगने की संभावना अधिक होती हैl यदि बस चालक शराबी हो तो हर मामलों से भी अधिक खतरनाक साबित होने में देर नहीं लगती l उसकी लापरवाही से भी गाड़ियों की आपसी टक्कर को अंजाम देता है l ऐसे में यात्रियों को आनंद लेने से अधिक उनका ध्यान बस चालक पर केंद्रित हो जाता है और बस यात्रा का मज़ा किरकिरा हो जाता है l
भारत में बस यात्रियों की अधिकांश कहानियाँ लगभग मिलती-जुलती है l जबकि चेन्नई से ऐसी अनूठी एक कथा भी सुनने को मिलती है जिसे भारतीय परंपरा की मान्यता से गठित करने की कोशिश की गई है l चेन्नई में बस यात्रियों को साल में एक दिन डरावनी घटनाओं से गुज़रना पड़ता है l चेन्नई के महाविद्यालयों के छात्रगण “ बस डे ” के नाम से उत्सव मनाते हैं l इस दिन छात्रों के नेता यानी तलै की शक्ति को जाँचा जाता है l इन विद्यार्थियों के नेताओं का मुख्य काम बस को रोकना है और जो जितने बसों को रोक सकता है उसे सबसे बड़ा शक्तिशाली नेता के रूप में प्रदर्शन करने का अवसर माना जाता है l छात्रों के इस तरह बस को अपने कब्ज़े में करने से यात्रियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है l
छात्रगण के इस व्यवहार से पीड़ित यात्रियों को अन्य दिवस भी दुविधा भरे होते हैं l हर दिन उनकी टोली में कुछ विद्यार्थी बस की सीट या बस के बॉडी पर फिल्मी गीतों की धुन बजा- बजाकर गीत गाते हैं और साथ में नाचते हैं l कुछ विद्यार्थी बस के फुटबोर्ड पर खड़े होकर नायक – सा अभिनय करते हैं तो कुछ बस की छत पर खड़े हो कर मस्ती करते हैं l बस के चालक एवं कंडक्टर की हालत इतनी खराब हो जाती है कि उन्हें मजबूर होकर चुपचाप खड़े होकर देखना पड़ता है l
इसी तरह मुंबई की ट्रेन यात्रा दुर्गम मानी जाती है क्योंकि यहाँ के लोकल ट्रेन केवल एक मिनट स्टेशन पर रुकती है l इस दौरान कम समय में पाँच सौ लोगों का ट्रेन से उतरना और उसी समय उससे अधिक लोगों का ट्रेन में चढ़ना एक साहसिक कदम – सा लगता है I इसीलिए मुंबई की ट्रेन यात्रा के इस दृश्य को महा घटना के रूप में माना गया है l लेकिन वही जनता रेलवे स्टेशन से निकलकर बस स्टेशन पर एक कतार पर एक के पीछे एक बड़े संयम से खड़े रहती हैं l इस दृश्य को देखकर उनकी अनुशासनशील व्यक्तित्व को दर्शाता है l यहाँ पर बस में चढ़ते वक्त न कोई धक्के – मुक्के, न ही कोई लड़ाई – झगड़े होते हैं l ऐसे में वे भारतवासियों के लिए एक मिसाल के रूप में उभरते हैं क्योंकि वे दूसरों के समय को भी सम्मानपूर्वक नज़रिये से देखते हैं l चाहे उन्हें देर भी हो जाए संयम में रहकर खुद पर समय का पालन न करने का पश्चात्ताप करते हैं l ऐसे में मुंबई वासियों को जीवन का महा-अनुभवी माना जाता है।
इस तरह बस में महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार के मामले भी भारत में अत्यधिक हैंl अश्लील गीत – संगीत गाकर परेशान करने के साथ- ही उनपर शारीरिक उपद्रव करने की हिम्मत रखते हैं l गुंडागर्दी करने वाले औरतों को तंग करने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं और कोई इनके ख़िलाफ आवाज़ नहीं उठाता है I कुछ राज्य के सरकार ने स्त्रियों को सुरक्षित यात्रा करवाने की कामना से ही लेडिस बस का आरंभ किया है l लेडिस बस के माध्यम से स्त्रियों की यात्रा बड़ी सुगमता से संपन्न हो जाती है l इसमें यात्रा करते हुए स्त्रियों को अपने गंतव्य में बिना किसी भय से पहुँचने का लक्ष्य पूरा हो जाता है l इस तरह की बस की संख्या में बढ़ोतरी करने से अधिक- से – अधिक स्त्रियाँ लाभ पा सकती हैं l इसके साथ ही कई राज्य जैसे तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, केरलम् तथा आंध्र प्रदेश के सरकारों ने महिलाओं को निःशुल्क का प्रबंध करवाया है l महिलाएँ टिकट के लिए पैसे खर्च किए बिना अमुक राज्य के स्थलों में एक स्थान से दूसरे स्थान यात्रा कर सकती हैं l ऐसे में अमुक राज्य के सरकार स्त्रियों के लिए आर्थिक रूप में सहायक हस्त बन चुकी है l इस सौगात से औरतों को बस यात्रा के दौरान अपनी यात्रा के लिए पैसे बिना खर्च किए उन पैसों का सही इस्तेमाल करने के लिए सरकार की इस योजना से पर्यटक विभाग लाभांवित हुए हैं lयदि इस पद्धति को पूरे भारत में महिलाओं के लिए प्रायोगिक तौर पर लागू किया जाए, तो देश का उद्धार अवश्य संभव है। इसके अतिरिक्त बस यात्रा के दौरान कई लोगों के कीमती सामान, मोबाइल फोन, जेवर आदि चोरी होने की घटनाएँ भी मिलती रहती हैंl भीड़ से भरी बस में लोगों का ध्यान अपनी चीज़ों पर न पड़ने पर यात्रियों की मानसिक अवस्था का लाभ उठाने वाले चोर आसानी से चोरी कर लेते हैं l
भारत में बस चालकों द्वारा सही – सलामत समय पर गंतव्य तक पहुँचाने को अपना कर्तव्य मानना चाहिए l भारत के वाहन चालकों को अपने काम से मतलब रखनी चाहिए l यात्रियों के साथ पक्षपात न करते हुए उनसे समत्व भाव में रखने की आवश्यकता है l इस तरह विद्यार्थियों के द्वारा शोर-शराबे के लिए बस यात्रा के दौरान के नियमों को उल्लंघन करने वालों के प्रति सबसे पहला कदम स्कूल – कॉलेज प्रबंधन को सूचना देकर केस दर्ज करने का नियम लागू करना है l इसके अतिरिक्त बस में यात्रा करने वाले हरेक व्यक्ति को ऊँचे स्वर में बोलने की अनुमति पर नियम बनाने से बस में गूँजती ध्वनि प्रदूषण को रोका जा सकता है l अंततः भारतीयों को नियम पालक के रूप में खड़े होने की आवश्यकता है ऐसे में, बस यात्रा से संबंधित सकारात्मक कहानियों के सृजन से अगली पीढ़ी में बस यात्रा के लिए और भी उत्साह पैदा होगा।
Penned by Jayaajitan.
Please comment your views to: jayaajitan@gmail.com

Leave a Reply