कविता: धनतेरस

दीन खड़े हैं बाजार में

सोने – चांदी की दमक

से दूर पर….

ऐश्वर्य की लहरें उठीं

उनके मन में

स्वास्थ्य ही बड़ा धन है

खुशियों का है यही भंडार ।

न तोलें धन से तन – मन को

धनतेरस के वैभव की बौछार में l

Penned by Jayaajitan.

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