दीन खड़े हैं बाजार में
सोने – चांदी की दमक
से दूर पर….
ऐश्वर्य की लहरें उठीं
उनके मन में
स्वास्थ्य ही बड़ा धन है
खुशियों का है यही भंडार ।
न तोलें धन से तन – मन को
धनतेरस के वैभव की बौछार में l
Penned by Jayaajitan.
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